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न्याय के लिए दर्जनों शिक्षक कर रहे हैं इंतजार

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बिलासपुर, 21 सितंबर 2025।
               एक पेंड्रा स्कूल के प्राचार्य को न्याय मिल जाने मात्र से छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन के कथित पदाधिकारीयों की मनमर्जी बंद नहीं होगी। दर्जनों शिक्षक और और अशैक्षणिक स्टाप को निलंबित किया गया है। रजिस्टर फॉर्म सोसायटी के समक्ष यह मामला 6 महीने से अधिक समय से लंबित है। और इस पर स्थगन हुआ था के बावजूद पदाधिकारी गण मनमर्जी करते हैं। शासकीय अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्राचार्य कक्ष का ताला तोड़कर कब्जा किया जाता है और सोशल मीडिया पर उसे न्याय कहा जाता है। एजुकेशन बोर्ड के स्कूल से समिति द्वारा पीएफ ना पटाने का मामला भी समय-समय पर उठता रहता है। यहां तक कहा जाता है कि पीएफ दफ्तर को हर महीने एक खास रकम देकर सेट रखा गया है। स्टाफ को प्रताड़ित करने का मामला महिला आयोग के समक्ष भी विचाराधीन है।
 गौरतलब है की मिशन स्कूल पेंड्रारोड जो अनुदान प्राप्त संस्था है जिसके संचलन का दावा छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड आफ एजुकेशन के द्वारा किया जाता है, साथ ही फर्म एवं संस्थान से पंजीकृत संस्था है शासकीय अनुदान प्राप्त शाला होने के कारण से शासन के सारे नियमों का पालन किये जाने हेतु संस्था बाध्य है। परंतु छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के वर्तमान पदाधिकारियो ने पिछले 2 वर्ष से लगातार अवैध संचालन कर आर्थिक अपराध व नियम विपरीत कार्य रहे हैं। इसी सिलसिले में मिशन स्कूल पेण्ड्रा की प्रभारी प्राचार्य भावना आर्थर जो अर्जित अवकाश में थी, अचानक छत्तीसगढ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के सचिव जयदीप रॉबिन्सन के नेतृत्व में स्कूल में बलवा करते हुए प्राचार्य कक्ष का ताला तोड़कर मिडिल स्कूल के कनिष्ठ शिक्षक को शासन के नियम के विपरीत प्राचार्य की कुर्सी में बैठा दिया जाता है, इस घटना ने शिक्षा जगत में हलचल मचा दिया कि किस तरीके से गुंडागर्दी करके शाला का संचालन और आर्थिक लाभ लेकर प्राचार्य की कुर्सी को प्राप्त करने का कार्य किया जाता है।
  छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड आफ एजुकेशन पर नीतिगत कार्यो में स्थगन है
  फर्म एवं संस्थान के न्यायालय द्वारा छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन पर 5.12.2024 से नीतिगत कार्य करने के लिए स्थगन आदेश प्रदान किया था उसके बाद भी पदाधिकारियो के द्वारा अवैध कार्य व मनमानी किया जा रही है जिस पर फर्म एवं संस्थान के माननीय न्यायालय में अवमानना का अपील किया गया था जिस पर सुनवाई के पश्चात कोर्ट का यह एक ऐतिहासिक निर्णय दिया गया, अपने आदेश में कोर्ट की अवमानना को सही मानते हुए उनके स्थगन आदेश के पाश्चात्य के सीडीबीई द्वारा लिए गए सारे आदेश निरस्त कर दिए गए, जिसमें सबसे प्रमुख पेंड्रारोड में बलवा करके श्रीमती भावना आर्थर को हटाने का निर्णय स्वयमेव ही निरस्त हो गया, श्रीमती भावना आर्थर ने 18 सितंबर को अपना चार्ज प्राप्त कर लिया और प्रचार की कुर्सी पर में आसीन हो गई है जिसकी जानकारी छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ एजुकेशन के अध्यक्ष एवं विकास का शिक्षा अधिकारी शिक्षा विभाग , थाना गौरेला एवं एसपी को प्रदान कर दिया गया है। पदस्थापना नगर पालिका गौरेला के अध्यक्ष श्री मुकेश दुबे ने इस विषय पर अपना हर्ष व्यक्त करने करते हुए कहा कि भावना आर्थर के प्राचार्य होने के पश्चात स्कूल बेहतर स्थिति में है और इस तरह से अचानक से संस्थाओं के द्वारा से किया जाने वाला निर्णय किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। 
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष कुलदीप ने कहा कि यह गौरेला के हिर्दय स्थल पर इस संस्था में किसी भी तरह की अनियमितता होने पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। जोगी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष श्री अशोक नगाइच एवं समाजसेवी ताहिर खान ने स्पष्ट किया कि यह शिक्षा के मंदिर में इस तरह का दखल एवं गुंडागर्दी कदापि उचित नहीं होगा । भाजपा पिछड़ा वर्ग के जिला अध्यक्ष श्री संदीप जायसवाल ने अभी इस विषय पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और नियम के विपरीत हो रहे तमाम कार्यवाही को रद्द होने पर अपनी खुशी जाहिर की। छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के पूर्व कोषाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ डायोसिस बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजय जॉन, नीलिमा रॉबिन्स, व्ही.के.सिंह, संदीप लाल, के.एम.बर्मन, अनुराग प्रकाश, महेंद्र मंडल, मरकुस दास, प्रफुल जेम्स, मिशन स्कूल के शिक्षक , विद्यार्थियों व समाज के गणमान्य नागरिकों ने फर्म सोसायटी के निर्णय का स्वागत किया है।