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समितियों का अनंत विवाद ईसाई समाज के लिए स्थाई अपयश बन गया

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बिलासपुर, 25 अगस्त 2025। 
रायपुर के गाॅस मेमोरियल संपत्ति प्रकरण ने ईसाई समाज की संपत्ति, समितियों का विवाद फिर से सार्वजनिक कर दिया। गॉस मेमोरियल के पूर्व बिलासपुर के मिशन अस्पताल का विवाद चर्चित हुआ जो अभी भी न्यायालय में है। उच्च न्यायालय से छत्तीसगढ़ डायोसिस की पिटीशन खारिज होने के तुरंत बाद रायपुर जिला प्रशासन ने गाॅस मेमोरियल की लीज निरस्त कर दी। ईसाई समाज की संपत्तियों का विवाद असल में ईसाई समाज की विभिन्न समितियां जो चर्च का संचालन करती है का विवाद है। यूसीएनआईटीए, सीएनआईटीए, सीडब्ल्यूबीएम, एससीएमएस, यूसीएमएस, आईसीसीडीसी, सीएनआई के बीच ये झगड़ा हैं। कई बार यह कहा जाता है कि जब मूल समितियां का मर्जर हो रहा था तो मर्जर के डॉक्यूमेंट उचित फोरम में जमा नहीं कराए गए। कई बार यह कहा जाता है कि चर्च की अचल संपत्तियों का असल कस्टोडियन रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया है। पर 2006 के एक सिविल कोर्ट के विवाद में दिए गए निर्णय में यह स्पष्ट होता है कि रिजर्व बैंक आफ इंडिया कस्टोडियन बनाया जरूर गया था पर यह कंडिका कभी लागू ही नहीं हुई। 
गुजरात राज्य के ईसाई समाज की संपत्तियों के संबंध में समितियों का विवाद उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक गया। 2013 में एक उच्चतम न्यायालय के बहुचर्चित फैसले ने सीएनआई के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया। और इस फैसले के खिलाफ की गई अपील भी काम कि नहीं रही अब केवल वक्त की बात है कि अलग-अलग जिलों के जिला प्रशासन नजूल की किसी संपत्ति से कब कि ईसाई समिति को बेदखल कर दे। छत्तीसगढ़ डायोसिस के वर्तमान पदाधिकारी समाज की संपत्तियों को बचाने के स्थान पर आपसी झगड़ों को कोर्ट की विषय वस्तु बनाते हैं आश्चर्य तो तब लगता है जब डायसिस के पदाधिकारी की याचिकाएं लोकस के बिंदु पर कोर्ट में नहीं टिकती पर अग्रिम जमानत याचिका के समय इसी लोकस को नजर अंदाज करते हुए भ्रष्टाचार के मामले में छत्तीसगढ़ डायोसिस के पदाधिकारी को जमानत का लाभ प्राप्त होता है।