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सबो भूमि गोपाल की...

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बिलासपुर, 4 मई 2025।
बिलासपुर के ऐतिहासिक परिवार राय साहब बनवारी लाल के प्रपौत्र कृष्णा कुमार अग्रवाल अपने नाम के अनुरूप ईसाई संस्थाओं की सभी भूमि को गोपाल का मान कर कब्जा कर लेते हैं। नजूल सीट नंबर 4 प्लॉट नंबर 85 का विवाद एक बार फिर से उच्च न्यायालय में और इस बार न्यायालय कृष्ण कुमार अग्रवाल पहुंचे हैं। यह कहते हुए की उनके भवन को निगम ने नियम विपरीत तरीके से तोड़ा इसी महीने में मिशन अस्पताल विरुद्ध जिला प्रशासन के प्रकरण में ईसाई संस्था को लीज पर प्राप्त भूमि सीट नंबर 14 के मामले में अंतिम तर्क करते हुए एडवोकेट जनरल ने स्पष्ट कहा कि लीज होल्डर को भूमि विक्रय करने का अधिकार नहीं था। इसी भूमि विवाद का प्रारंभ ईसाई सस्था द्वारा सीट नंबर 14 और सीट नंबर 4 की भूमि का विक्रय करने से जुड़ा है। संस्था ने सीट नंबर 14 जिसे मिशन अस्पताल के नाम से पहचाना जाता है और सीट नंबर 4 जो एस्ले बांग्ला जिसे तोड़ा गया और इस एस्ले बंगले को तोड़ने का काम भूमि स्वामी ने समझौता पत्र हस्ताक्षर होने के बाद स्वयं किया, साथ ही कई ऐसे पेड़ भी गैर कानूनी तरीके से काटे जिनकी आयु 60 वर्ष से ज्यादा की थी। सीट नंबर 4 का विवाद अग्रवाल परिवार सत्र न्यायालय से लेकर उच्च न्यालय तक हारा और बाद में आईसीसीडीसी और भू स्वामी कृष्ण कुमार अग्रवाल के मध्य एक समझौता हुआ जिसकी कॉफी कोर्ट में प्रस्तुत है। इस दस्तावेज से स्पष्ट है कि कृष्ण कुमार अग्रवाल के पक्ष में 34081 वर्ग फुट जमीन ही चढ़ी, पर उन्होंने छल पूर्वक 129075 स्क्वायर फीट कब्जा कर लिया। साथ ही प्लॉट नंबर 85/1 का आम रास्ता 25 फीट को भी पूरा दवा लिया और अपनी बाउंड्री वॉल खिच दी। सीट नंबर 4 की जमीन के कई विवाद न्यायालय में लंबित है। 
इसी सीट का एक टुकड़ा लगभग 6000 स्क्वायर फीट के कथित भू स्वामी ने स्वयं को सामान्य श्रेणी का बात कर 6 टुकड़ो में एक करोड़ 36 लाख रुपए में बेचा है। यूसीएमएस संस्था इस फर्जी बिक्री को व्यवहार न्यायालय में लड़ रही है। इसी तरह सीट नंबर 4, प्लॉट नंबर 85 के विवाद को आईसीसीडीसी कृष्ण कुमार अग्रवाल के साथ लड़ रही है। इस जमीन का कथित भू स्वामियों द्वारा विवाद भवन बनाने का आईडिया काफी पुराना है। भाजपा के तीसरे कार्यकाल में इस जमीन पर अधिवक्ता नत्थू लाल सोनी ने एक विवाह घर खड़ा किया था। उसे भी नगर निगम ने तोड़ा था। एस्ले बांग्ला जिसकी आयु लगभग 100 वर्ष थी उस जमीन पर कब्जा लेने के बाद जमीन के स्वामी और कब्जाधारी ने चारों तरफ टिन की 10 फीट ऊंची चादरें लगाई और मशीने लगाकर ऐतिहासिक धरोहर एस्ले बंगले को तोड़ा और उसे मैदान बना दिया। अब रोड साइड पर एक नया आरसीसी स्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा था जिसे हाल ही में निगम ने तोड़ा है और यह विवाद फिर से उच्च न्यालय पहुंचे गया है। ईसाई संस्थाओं की जमीन और राय साहब बनवारी लाल की भूमि का विवाद ऐतिहासिक है।