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इतना बेबस, निरिह, बेचारा ईसाई समाज कभी नहीं दिखा

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बिलासपुर, 4 दिसंबर 2024। 
स्वतंत्र भारत के इतिहास में ईसाई समाज को इतना निरिह, बेबस कभी नहीं देखा गया। जैसा इस समय बिलासपुर में देखा जा रहा है। ये सब बिलासपुर में किसी गांव या सुदूर क्षेत्र में नहीं हो रहा है। 12 एकड़ की जमीन में स्थित जिन भवनों को जिला प्रशासन, नगर पालिका निगम मिलकर अपने अधिकार में कर रहे हैं और निगम के दफ्तर खुलवा रहे हैं उनकी दूरी कलेक्ट्रेट, निगम आयुक्त, राजस्व मंडल और जिला न्यायालय से मुश्किल से 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है।
22 अगस्त 2024 के दिन जब जिला प्रशासन के मुखिया ने इस जमीन का लीज निरस्तीकरण आदेश जारी किया तब उसे आदेश में निरस्तीकरण का आधार यह बनाया गया कि लीज धारक को जिस उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा संचालन के लिए भूखंड दिया गया उसने इससे इतर उसका उपयोग किया। अत: लीज निरस्त की जाती है 
जिले से प्रकाशित एक बड़े हिंदी दैनिक ने जिला प्रशासन के मुखिया का वक्तव्य छपा है। जमीन मूल स्वरूप में वापस होगी पर 12 एकड़ की इस भूखंड का बजाज मूल्य 10000 करोड़ बताया जाता है। कल तक जिन भवनों को भयप्रद बताया जा रहा था उसमें अब निगम के दफ्तर खोले जा रहे हैं, जो जमीन स्वास्थ्य सेवा के लिए आवंटित थी उसका लेंड यूज़ कुछ ही दिनों में कैसे बदल दिया और नजूल से आयुक्त और आयुक्त से राजस्व मंडल न्यायालयों में जिस तरह से सुनवाई में शिथिलता देखी गई व्यवहार न्यायालय में वाद के लंबित होने के बावजूद जिस तरह से प्रशासन ने भावनाओं पर कब्जा किया और उसमें अपने दफ्तर खोल दिए लगता है बहुसंख्यक शासक के सामने ईसाई समाज बेजार, निरिह, बेबस और बेहद कमजोर नजर आ रहा है।
 कल 5 जनवरी रविवार है। और इसी परिसर में कलीसिया भी लगता है शायद चर्च प्रशासन को सद्बुद्धि मिले प्रार्थना के अतिरिक्त कुछ नहीं मांग सकता। यदि तीसरे दिन भी प्रशासन की कार्यवाही जारी रही तो अब कलीसिया और मकान की बारी है।