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31 में एक थे विद्यार्थी, आज है कई पत्रकार हाथ में माचिस लेकर
- By 24hnbc --
- Thursday, 17 Oct, 2024
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बिलासपुर, 18 अक्टूबर 2024।
वर-दे वर-दे वर-दे वीणा वादिनी वर-दे, जय जय मां, जय जय मां इस शांत और आध्यात्मिक भजन को इस महीने हमने कई बार सुना। नवरात्रि समाप्त होते होते इन तमाम भजनों को एक तरफ रखते हुए हम डीजे के कान फोडू चक्कर में पढ़ी जाए। 1931 में कानपुर के दंगों में दंगों की रोकथाम करते पत्रकार संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उस समय तो भारत स्वतंत्र भी नहीं हुआ था। 17 साल और लगे तब हमारे पूर्वजों को स्वतंत्रता का स्वाद मिला उसे वक्त के शायद ही अब कोई बच्चे होंगे, जो बच गए होंगे उन्होंने श्रम के मारे अपनी गर्दन झुका ली होगी।
हम पिछले एक दशक से देख रहे हैं कि किस तरह देश के चर्चित पत्रकार अपनी पूरी कुटिल बौद्धिक क्षमता से सांप्रदायिक विद्वेष और दंगा भड़काने में पीछे नहीं रहते इनमें से कई समय-समय पर पत्रकारिता में स्वर्गीय विद्यार्थी जी का नाम भी लेते रहते हैं। विद्यार्थी जी ने एक समय लिखा था कि लाउडस्पीकर की आवाजों से दंगे भड़काए गए आज वही काम उससे कई गुना तेज ध्वनि वाला डीजे करता है और समय के साथ-साथ हमने तय कर लिया है कि हम हिंसक है। और हिंसक होने के साथ हम अधर्मी भी हैं। जब कभी भी किसी भी राज्य में भाजपा की सरकार को ऐसा लगेगा कि उसका ध्रुवीकरण कमजोर पड़ रहा है। फेविकोल का मजबूत जोर लगाने सांप्रदायिक हिंसा कराई जाएगी। शेष समय पर हिंसा पूर्व तनाव जिसे शांति कहा जाएगा कायम रहेगा। सांप्रदायिक हिंसा भारत के किसी भी राज्य में होगी वह असम में हो सकती है, उत्तर प्रदेश में हो सकती है, छत्तीसगढ़ में हो सकती है, मध्य प्रदेश में हो सकती है और बाजारवाद की आड़ में कोयला, यूरेनियम निकालने के लिए सत्ता के साथ अडानी जंगल कटेगा, पुलिस सत्ता के साथ रहेगी, मूल निवासी को नक्सली कह दिया जाएगा, जो शहर से जंगल का समर्थन करेगा उसे शहरी नक्सली कह दिया जाएगा। आम जनता को सांप्रदायिक हिंसा में फंसा कर सरकार कुछ कॉरपोरेट को और धन दे देगी। सांप्रदायिक हिंसा के कारण सार्वजनिक संपत्ति का जो नुकसान होगा उसकी क्षतिपूर्ति आम आदमी करेगा। कॉर्पोरेट नहीं लुटियन दिल्ली से लेकर हसदेव तक का सच यही है।
हसदेव में जंगल कट रहा है नागपुर के केशव कुंज को इसका नुकसान तब पता चलेगा जब वहां भी पानी कम गिरेगा। भीषण ठंड या गर्मी पड़ेगी।


