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उल्टी शाल उल्टी बड़ी चाल क्या सोच कर देश की आत्मा को लूटने के बना रहे हैं प्लान

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । वन नेशन वन इलेक्शन के थीम के पीछे यही सोच थी कि एक बार पूरे देश में चुनाव हो और अगले 5 साल तक कभी भी जनता के बीच जाने का बहना हो फुल निरंकुशता और अपने कुछ दोस्तों का भला करने की संपूर्ण आजादी पर भारत जिसकी आत्मा गांव में बसती है और देश की जनसंख्या का पहले 70% अब 60% कृषि पर आधारित है ऐसा संभव नहीं है 2014 के बाद आज जब 2021 पर खड़े हैं तो देश की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है । उद्योगपतियों को पूंजी मिल चुकी है और अब पूंजी का उपयोग उद्योग के स्थान पर भूमि में करने का षड्यंत्र है जिसमें खेती, खनिज और पानी शामिल है यही कारण है कि पहले भूमि अधिग्रहण कानून को विधान सभाओं के माध्यम से बदला गया और बाद में श्रम कानूनों को बदला गया दोनों में जब सफलता मिल गई तो सीधे तीन कृषि कानून इसकी आत्मा पर पटक दिया गया बस यही से मामला उल्टा पड़ गया ओपन मार्केट, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, भंडारण भी निजी, सिक्स लाइन और एक्सप्रेसवे जैसे दिलकश शब्दों के माध्यम से दोस्तों के लिए छल पूर्वक रास्ता बनाते हुए देश के महाराजा जो स्वयं को प्रधान सेवक कहते हैं और उनके पीछे खड़े उनके सेवक जिन्हें एमपी कहा जाता था। था इसलिए क्योंकि जिन जनप्रतिनिधियों ने अपनी व्यक्तिगत सोच बुद्धि को किनारे रखकर अपने नेता के हर वाक्य को आप्तवचन मांग कर स्वीकार कर लिया है उसे सांसद तो नहीं कहा जा सकता कृषि क्षेत्र में 80 हजार करोड़ की सब्सिडी को देकर एहसान जताते हैं और उसे बंद करने के रोज नए-नए तरीके निकालते हैं जबकि उद्योग जगत के 500 लोगों को इससे ज्यादा की सब्सिडी हमेशा दी जाती है उसके बावजूद उद्योग अब रोजगार का साधन नहीं बन पा रहे यही कारण है कि उद्योगपतियों को खेती की ओर भेजा जा रहा है और पहला काम श्रम कानूनों को खत्म किया गया है। सस्ता मजदूर श्रम कानूनों को खत्म करके ही मिलेगा यदि देश की श्रम शक्ति श्रम कानूनों के समाप्त होते समय ही जाग गई होती और उसे किसान भाइयों का सहयोग प्राप्त हो जाता तो श्रम कानूनों को समाप्त करने का षड्यंत्र पूरा नहीं होता। 
पढ़ने वाले याद रखें कि देश में काम के घंटे समाप्त हो चुके हैं और अब बाजार 24 घंटे खोला जा सकता है। देश के बड़े शहरों में रात्रि कालीन मॉल खुलने ही लगे हैं महिलाओं को भी रात्रि पाली में काम करने की छूट दे दी गई है साथ ही यूनिट में यूनियन नहीं बनाने के लिए भी नियम बना दिया गया है इन सब हटकंडे के बाद भी मोनेटाइजेशन जैसी स्कीम के बावजूद उद्योगों को पंख नहीं लगा तब नेशनलाइजेशन की जगह प्राइवेटाइजेशन निजीकरण करते हुए देश की खनिज की खदानें निजी क्षेत्र को दे दी गई । मध्यप्रदेश के पन्ना क्षेत्र में ढाई लाख पेड़ कटेगा और हीरा निकाला जाएगा अभी हाल ही में देश के प्रधान सेवक ने जंगल में रहने वालों को असली हीरा कहां है और इन्हीं हीरो के बीच से एक नया भगवान भी पैदा किया है असली हीरे जंगलों में रहते हैं तो ढाई लाख पेड़ काटकर पहले हीरो को जो जमीन के बाहर है उनसे उनकी पहचान छिनी जाएगी फिर जमीन से हीरा निकाला जाएगा असली हीरे केवल भाषणों में रहेंगे और अब तो उन्हें भगवान कह दिया गया है तो भगवान का स्थान कहां है सबको पता है और उन्हें ताले में रखकर इस देश का एक वर्ग वर्षों से अपना उल्लू सीधा कर रहा है। 
प्रकाश पर्व के दिन जब प्रधान सेवक ने देश की जनता को संबोधित किया तो शायद ही किसी की नजर गई हो कि इस बार ओढी हुई शाल उल्टी थी चालें भी उल्टी ही पड़ी है भला है कि वन नेशन वन इलेक्शन नहीं है और इस बार जिस प्रदेश में चुनाव है वहां से 80 एमपी आते हैं यदि यह राज्य कांटे की चक्कर में फस गया और 80 एमपी जब अपने अपने मतदाता से वोट मांगने जाएंगे तो जनता से इस बार अपना चेहरा दिखा कर वोट मांगेंगे या प्रधान सेवक का.. ..