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ग्रामीणों, सुरक्षाबलों और नक्सलियों किसी के साथ नहीं खड़ी भूपेश सरकार..... धरमलाल कौशिक

24 HNBC. बिलासपुर

बिलासपुर। कानून व्यवस्था राज्य अनुसूची का विषय है और छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार इस विषय पर बुरी तरह से फ्लॉक नजर आ रही है। नक्सल मोर्चे पर उन्होंने तीनों पक्षों के साथ न्याय न करने की नीति बना ली है, जो कि उन्हीं के घोषणापत्र से एकदम विपरीत है। सुकमा जिले के ग्रामीण अंचल में इन दिनों ग्रामीण नागरिकों की आड़ में नक्सलवादियों ने सुरक्षाबलों के बेस कैंप का विरोध किया है और उसी दौरान सुरक्षाबलों द्वारा गोली चालन हुआ है जिसमें जनहानि हुई है। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने न्यायिक जांच की मांग की उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश के द्वारा अथवा राज्य सरकार को जिस जांच एजेंसी पर भरोसा हो उसके द्वारा इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जानी चाहिए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के साथ खड़ी नहीं दिख रही है वह सुरक्षा बलों के मनोबल को भी बढ़ाने वाली नीति पर चलती नहीं दिखती साथ ही साथ अपने घोषणापत्र में जो वादा किया था गोली की बात नहीं बोली से होगी वार्ता, उस पर भी भूपेश बघेल खरे उतरते नहीं दिख रहे हैं। अब बघेल के नेतृत्व को 2 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है किंतु सरकार और नक्सलाइट किसी समझौता वार्ता की ओर बढ़ते नजर नहीं आते उल्टे सरकार की ढुलमुल नीति के कारण राज्य में नक्सलवाद बढ़ गया है जिसमें आम नागरिक, राजनीतिक जनप्रतिनिधि, नौकरशाह, शासकीय कर्मचारी और सुरक्षा बल स्वयं को फंसा पाते हैं। डॉक्टर रमन के कार्यकाल में नक्सली अंदर धकेल दिए गए थे किंतु कांग्रेस की सरकार बनने के बाद नक्सलियों को ऐसा लगता है कि यह सरकार तो उन्हीं की है और उन्होंने अपना खुला रुप दिखाना शुरू कर दिया । प्रायोजित माध्यमों से समय-समय पर यह खबर फैलाई जाती है कि बड़े नक्सली नेता समर्पण करने वाले हैं किंतु ऐसा होता नहीं है असल में मुख्यमंत्री और इस संबंध में उनके रणनीतिकार आज तारीख तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बना सके। धरमलाल कौशिक ने कहा कि केंद्र से राज्य सरकार को हर संभव और मांगी हुई मदद मिल रही है। किंतु राज्य सरकार ने सुरक्षाबलों के हाथ बांध रखे हैं ऐसे में इस बात को सीधे शब्दों में कहा जा सकता है कि जब तक भूपेश बघेल की सरकार है नक्सलवाद पर सीधा नियंत्रण नहीं हो सकता है।