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दो पाटो के बीच में साबूत बचे न कोई

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बिलासपुर, 29 मार्च 2026। 
यह दो पाट व्यवसायिक स्कूल और कोचिंग है भ्रमित करने के लिए इसका नाम कभी मंदिर तो कभी गुरुकुल भी कर दिया जाता है। कोचिंग के नाम तो ब्रह्मास्त्र तक रख लिया गया है और यह ब्रह्मास्त्र पालक के गृहस्थ नामक विमान को इस तरह मार करता है कि जीवन और उसकी उम्मीदें लहू लोहान हो जाती है। 
किसी भी दंपति का पहला सपना शिक्षा प्राप्ति के बाद यही होता है कि उनका बच्चा बेहतर से बेहतर संस्थान में शिक्षित हो और यही से शुरू होता है दोहन का सिलसिला... शहर में नर्सरी, किंडर गार्डन, नोनीहाल और जाने किन-किन नाम से कक्षा एक के पहले की दुकानें संचालित हैं। यह दुकान कॉलोनी क्षेत्र में पूर्व के एचआईवी मकान में आमतौर पर खुली देखी जा सकती है। 2 घंटे अधिकतम की फीस प्रति माह 3 से 4000 है और प्रवेश के वक्त अन्य शुल्क अलग से साल भर हर महीने माता-पिता को पता ही नहीं चलता कि इतने दिन विशेष एक शैक्षणिक कैलेंडर में हो सकते हैं। जिनके नाम पर आयोजन रखकर जेब काटी जा सकती है। 
अधिकतर बड़े नाम की रानी स्कूल ने अपने केजी स्वरूप आउटलेट पूरे बिलासपुर में फैला रखा है। कुछ स्कूल के बड़े स्कूल से एडमिशन की मौखिक एमओयू की बात भी सुनाई देती है। यदि आप अपनी ही कॉलोनी में सुबह 8:00 से 8:30 के बीच एक चक्कर कटे तो इन केजी संस्थाओं की कहानी अपने आप समझ आएगी। 
नोट:- शिक्षा क्षेत्र के व्यापक निम्न स्तरीय, बाजारी कारण के बीच हम कुछ ऐसे स्कूलों का विवरण भी देंगे जहां पर साधारण फीस में बेहतर शिक्षा दी जा रही है। तो ऐसे पलक जिन्हें अपने शिशु को उचित फीस पर शिक्षा दिलानी हो वे हमारी जानकारी का उपयोग करें। और शिक्षा के घोर व्यावसायीकरण को रोकने में सहयोग करें।