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यहां काफी नहीं विरासत की खुशबू है परंपरा की महक है, ग्राहक नहीं यहां मेहमान आते हैं।

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बिलासपुर, 10 जनवरी 2026। 
सहकारिता के क्षेत्र में 9 जनवरी बेहद महत्वपूर्ण दिन है इसी तारीख को भारत में इंडियन कॉफी हाउस का उदय हुआ। 1958 इंडियन कॉफी वर्कर कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड रजिस्ट्रेशन नंबर 1485 इस तरह इस सफर को 69 साल हो गए। सहकारिता के क्षेत्र में एक मिसाल है। इंडियन कॉफी हाउस यहां सीखने के लिए बहुत कुछ है 69 सालों में कभी इस संस्था को मेहमानों की कमी नहीं हुई। सुबह 7:00 कहीं कॉफी मिले या ना मिले यहां मिल जाती है वह भी बेहद प्रति प्रतिस्पर्धात्मक दाम पर आज बिलासपुर का ही उदाहरण लें स्टार बस टाटा 150 रुपए न्यूनतम कॉफी का दाम और इंडियन काफी हाउस मात्र ₹30 इस जगह पर कभी भी यह नहीं पूछा जाता और क्या लाऊं आप एक कप कॉफी पीकर भी 1 घंटे बैठ सकते हैं। क्या यह सुविधा या मेहमान नवाजी किसी और व्यावसायिक संस्था में संभव है असल में काफी हाउस एक संस्कृति है विचारधारा श्रृंखला है जो कुछ ऐसे लोग हैं जो इसे समझते हैं वह इस विरासत से सीख भी लेते हैं कैसे एक ही हाल में टेबल अलग-अलग काम के बीच बट जाती है। 
जबलपुर का करमचंद चौक स्थित कॉफी हाउस और उसके सेंट्रल टेबल पर बैठने के लिए असाधारण योग्यता अघोषित रूप से होती, रंग कर्मी, साहित्यकार के बैठने के लिए अलग स्थान निर्धारित रहा उन टेबलों पर और कोई बैठता ही नहीं। एम आर भी आते थे पर वह भी अपने निर्धारित स्थानों पर जाते थे जिन मेहमानों ने इस अघोषित व्यवस्था को समझा आज भी उसका पालन करते हैं। कॉफी हाउस वर्षों से डेटिंग करने वाले हर आयु वर्ग के पसंदीदा जगह है और रहेगी। 
बिलासपुर में कॉफी हाउस की शुरुआत दयालबंद क्षेत्र से हुई एक से दो, तीन, चार और अब पांच एनटीपीसी से सुदूर से हाई कोर्ट परिसर तक एक सा माहौल पुराने थिएटर सिद्धार्थ टॉकीज चले जाइए या अशोक नगर मुख्य मार्ग में स्थित आधुनिक बिल्डिंग में चले जाइए साफ सफाई से लेकर व्यंजन की गुणवत्ता व स्वाद तक एक सा मिलेगा। भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई देगी। ओडम हो, क्रिसमस हो या दिवाली हर त्यौहार यहां मनाया जाता है हमारी ओर से कॉफी हाउस के हर सदस्य को इस विरासत को संभालने के लिए शुभकामनाएं।