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लगातार बढ़ रही अग्नि दुर्घटना हम क्यों नहीं लेते सीख

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बिलासपुर, 7 जनवरी 2025। 
मोपका के सब स्टेशन अग्निकांड ने स्मार्ट सिटी के अग्निशमन व्यवस्था की फिर से पोल पट्टी खोल दी। आपातकालीन सेवा जिसे अग्निशमन कहा जाता है के लिए नगर सेना उत्तरदाई है अर्थात फायर सेफ्टी का पूरा काम होमगार्ड के अधीन है। शहर में कहीं भी अग्नि दुर्घटना होती है तो उसे बुझाने का काम इन्हें ही करना है। जिस तरह ऑटोमोबाइल उद्योग में गति पर जितना पैसा खर्च किया जाएगा उतना ही पैसा ब्रेक प्रणाली पर भी होगा पर शहर नियोजन के संदर्भ में यह सिद्धांत राज्य सरकार भूल जाती है। अधोसंरचना विकास, नगर निर्माण, बहु मंजिला भवन, उद्योगों की स्थापना सबके लिए बजट है पर नगरी निकाय की बजट में अग्निशमन सेवाओं पर बहुत कम पैसा रखा जाता है। जब फायर सेफ्टी नगर निगम के अधीन थी तब पंप हाउस में ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां खड़ी करने की व्यवस्था थी। होमगार्ड को यह काम मिला तब भी फायर ब्रिगेड के लिए अलग से जमीन आवंटन नहीं हुई। 
विद्युत मंडल संवेदनशील स्थान है जहां से अग्नि दुर्घटना की संभावनाएं सर्वाधिक है। ताप विद्युत गृह में इसी कारण उनकी अपनी फायर सेफ्टी व्यवस्था है और वे अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए फायर सेफ्टी पर पर्याप्त ध्यान भी देते हैं यही कारण है कि जब कभी कहीं बाहर अग्नि दुर्घटना होती है तो एनटीपीसी सीपत, और जांजगीर से भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आ जाती है।
 मोपका की दुर्घटना 6 जनवरी के पूर्व पिछले 10 दिनों में बिलासपुर के आसपास तीन बड़ी अग्नि दुर्घटना हुई पर हम सीख नहीं लेने वाले लोग हैं। संवेदनशील स्थानों पर अग्नि से बचने के परंपरागत तरीके और आधुनिक तरीके हम एकत्र नहीं करते उलट हमने दुर्घटना को बढ़ाने वाले तरीके एकत्र कर लिए हैं। विद्युत मंडल मोपका में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि बिजली कट जाने पर वहां के ट्यूबवेल वैकल्पिक ऊर्जा से चलाए जा सके। ले लिहाजा ऐसी तकनीकों पर ध्यान देना चाहिए। केवल ड्रिल करने से कुछ नहीं होने वाला।