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आत्मीयता और बाजार की ताकत के बीच हमने स्वागत कर ही लिया 2026 का
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बिलासपुर, 1 जनवरी 2026।
लाख प्रयास के बाद भी सनातन धर्म की सहीष्णुता वाली छवि बनी हुई है और इसका एक बड़ा कारण बाजार की ताकते मंदिर हो या कोई भी उपासना स्थल सब की डोर बाजार के हाथ में है। 1 जनवरी 2026 नए साल का स्वागत करने और ईश्वर का आशीर्वाद लेने भक्तगण जब सुबह-सुबह मंदिर पहुंचे तो मंदिरों में गुब्बारे की सजावट थी। कौन किसे, किस तिथि सूर्य, चंद्र को देखकर नया वर्ष मानता है। इस पर चर्चा करने से अच्छा है कि सब की खुशियों में अपने-अपने तरीके से शामिल रहा जाएं।
1 जनवरी की सुबह के पूर्व 2025 की अंतिम रात शहर के गार्डन, रेस्टोरेंट, पब और वाटर पार्क में अलग तरह की थी ऐसे कार्यक्रमों में बाउंसर सबसे पहले जरूरी हो गया है। एंट्री फी के अतिरिक्त भी अंदर डी और सेन्टर का अलग टिकट पार्टी के अंदर पार्टी और अंदर के अंदर की पार्टी आयोजन को जहां परतदार परत बनती है उसे संदेश के घेरे में लाती है ऐसे आयोजनों में मेहमान पुरुष तो स्थानीय दिखाई देते हैं पर युवतियां स्थानीय नहीं होती यहीं से पता चलता है कि शहर की शिक्षा जगत में वे छात्राएं जो अन्य जिलों से आई हैं उनमें से कुछ अपना करियर अलग तरह से गढ़ रहे हैं। और इन्हीं में कुछ गैर कानूनी गतिविधियों में लगे हैं पर यह सब कब तक चलता रहता है जब तक अंदर ही कोई गड़बड़ी नहीं होती। उच्च वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग और उससे नीचे सब वर्गों में नए साल के स्वागत के लिए आयोजन रखें कहीं आत्मीयता थी तो कहीं व्यवसाय....


