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सरकार पक्की नौकरी से कम पर अड़ी है, हड़ताली कर्मचारी पूरी मांगों पर दे रहे बल

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बिलासपुर, 13 सितंबर 2025। 
जिनसे गारंटी के नाम पर वोट मांगा उनकी मांगों पर अब तक निर्णय होता नहीं दिखाई दे रहा है। हां हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम में चल रही हड़ताल। 18 अगस्त से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण पूरे राज्य के स्वास्थ्य सेवा बाधित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया हड़ताल समाप्त करने में असफल हो रहे हैं। आंदोलनरत 25 अधिकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के बावजूद हड़ताली कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं। कारण एनएचएम में नारी शक्ति ही मुख्य है जब से एनएचएम का गठन हुआ इसका बेजा उपयोग नेताओं की सभा में भीड़ बढ़ने से लेकर हर सरकारी कार्यक्रमों में हुआ। कांग्रेस सरकार को निपटने के लिए भाजपा ने जो घोषणा पत्र तैयार किया उसमें एनएचएम के लिए लुभावनी घोषणा थी। सुरक्षित भविष्य के खातिर यह वोट बैंक इधर से उधर हो गई। एनएचएम के हड़ताली कर्मचारी जानते हैं एक बार दबाव में हड़ताल खत्म कर दी तो दोबारा ऐसी एकता और माहौल नहीं बनेगा। विभाग के मंत्री से लेकर सचिन तक ले देकर हड़ताल निपटाने के मुड पर है। पक्की नौकरी देना नहीं चाहते जबकि शिक्षा विभाग में ऐसा हो चुका है। जब एक बार शिक्षा कर्मी नियमित किया जा सकते हैं तो एनएचएम की रगों में क्या खून नहीं बहता। शिक्षा कर्मी का आंदोलन सफल रहा तो एनएचएम की मांगे मान लेने से सरकार को कुछ 100 करोड़ ही तो और लगेगा। जब राज्य में पूर्व आईएएस अधिकारी वित्त मंत्री हो तो बजट तो चुटकी का खेल है।
 
 
 
 
 
 
 
(समाचार संकलन डॉली पटेल)