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गारंटी ही तो मांग रहे हैं डरते हैं जुमला ना घोषित हो जाए

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बिलासपुर, 30 अगस्त 2025। 
आमतौर पर शासन के कर्मचारी और अधिकारी चुनाव के एक वर्ष पहले हड़ताल पर जाना शुरू करते हैं। पर छत्तीसगढ़ यहां पर भाजपा की सरकार बनी विष्णु का सुशासन स्थापित हुआ और विकास साए साए होने लगा। वहां सरकार का एक भी ऐसा मंत्रालय नहीं बचा जिसके कर्मचारियों अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल न की हो अभी आज ही समाचार पत्रों से पता चला कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का परफॉर्मेंस दो नंबर पर है। स्वास्थ्य विभाग में इन दोनों बड़ी मात्रा में कर्मचारी हड़ताल पर है और ये सब कुछ ज्यादा नहीं मोदी की गारंटी मांग रहे हैं जो विधानसभा चुनाव के समय स्वयं मोदी ने दी थी। कर्मचारियों को लगता है कथित सुशासन आए 2 साल हो गया चाणक्य गारंटी को जुमला न कर दे। उन्हें यह भी डर है की गारंटी को जुमला बोलने पर एफआईआर भी हो सकती है। हमारे देश का राजनीतिक इतिहास इतना समृद्ध है कि एक चाणक्य के अतिरिक्त कोई दूसरा निपुण यूनिट हुआ ही नहीं और चौसड जो अब गैरकानूनी है का एक ही खिलाड़ी हुआ शकुनी। 
स्वास्थ्य विभाग में हड़ताल के बाद स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही है। यहां तक की अनिवार्य सेवा टीकाकरण पर भी असर दिखाई दे रहा है और मुख्यमंत्री को जापान दिखाई दे रहा है। मंत्री सरकारी जनसंपर्क के जरिए सकारात्मक खबरों का बदला रोज फाड़ रहे हैं। पर कितनों का मुंह बंद करेंगे स्वदेशी के चक्कर में आम जनता की पतलून उतर गई है। इसी महीने पूरे मंत्रिमंडल और कई विधायकों ने जिला मुख्यालय पर प्यारा झंडा फहराया था और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया था। उन्होंने क्या कहा था क्या वादे किए यहां तो शासन के कर्मचारी ही गारंटी ना मिलने की बात कह रहे हैं।