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चुनाव में मुंह की खाने के बाद भी रुक नहीं रहा संविधान पर हमला

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बिलासपुर, 26 सितंबर 2024। 
अभी लोकतंत्र चुनाव का नतीजा आए हुए 100 दिन से कुछ दिन ज्यादा हुए हैं पर एक बात स्पष्ट है कि चुनाव में स्पष्ट बहुमत न मिलने के बावजूद भाजपा संविधान को खतरे में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं। जो लोग अब संविधान पर हमला कर रहे हैं उन्हें फ्रिंच एलिमेंट नहीं कहा जा सकता। तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि जो आईपीएस अधिकारी हुआ करते थे ने 22 सितंबर को कन्याकुमारी में कहा धर्मनिरपेक्षता एक यूरोपियन अवधारणा है और भारत को इसकी जरूरत नहीं है। वे यही नहीं रुके आगे कहते हैं भारत के लोगों के साथ कई सारे फ्रॉड हुए हैं। धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा उसमें से एक है। भारत एक धर्म केंद्रित राष्ट्र है और इसलिए यह संविधान का हिस्सा नहीं था लेकिन एक असुरक्षित प्रधानमंत्री ने आपातकाल के दौरान इसे संविधान में जुड़वाया। आर्यन रवि वर्तमान प्रधानमंत्री के गुड बुक में टाप पर रहना चाहते हैं। इसलिए समय-समय पर वे बयान बाजी करते ही रहते हैं। हमारे संविधान में जो मौलिक अधिकार दिए गए हैं उनमें धार्मिक स्वतंत्रता एक है। भारतीय संविधान में जी धर्मनिरपेक्षता का उल्लेख है वह सकारात्मक अवधारणा है संविधान निर्माण के समय से ही धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा इसमें मौजूद थी। संविधान के भाग 3 में वर्णित मौलिक अधिकारों में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28 इसका प्रमाण है। 
इंदिरा गांधी दूरदर्शी प्रधानमंत्री रही इसी कारण उन्होंने यह शब्द प्रस्तावना में जुड़वाया। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है भारत सरकार धाम के मामले में तटस्थ रहेगी और उसका अपना कोई धार्मिक पथ नहीं होगा। देश के नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार धार्मिक उपासना का अधिकार रखते हैं। यहां तक की ऐसा नागरिक जो नास्तिक है उसके विचारों का आधार भी देश के भीतर होगा। सब को एक सा सुरक्षित जीवन मिले यह सरकार की जिम्मेदारी है।
पश्चिमी देशों में धर्मनिरपेक्ष सरकारें और अदालते जब भी हस्तक्षेप नहीं करती जब कोई धार्मिक संस्था किसी समुदाय के लिए कोई निर्देश देती है। लेकिन धर्मनिरपेक्ष भारत में धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश जैसे मुद्दों में राज्य और न्यायालय दखल दे सकते हैं देते हैं। इसलिए धर्मनिरपेक्ष को यूरोपियन अवधारणा बताकर उसे भारतीयों के साथ धोखा कहना असल में संविधान विरोधी है। इसलिए हम स्पष्ट कर रहे हैं कि संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर हमले हमें नहीं बढ़ गए और यह काम बीजेपी और उसके लोग बखूबी किसके निर्देश पर कर रहे हैं यह स्पष्ट समझ आता है। 
राज्यपाल महोदय को धर्मनिरपेक्षता यूरोपियन दिखाई देती है तो उन्हें यह भी समझना चाहिए कि भारतीय प्रशासनिक सेवा का पूरा मॉडल ब्रिटिश सरकार की देन है। वे जिस गवर्नर पद पर बैठे हैं वह भी अंग्रेजी राज्य की उपज है। भाजपा का स्वदेशी कारण गायब हुए, पूंजीवाद में तब्दील हुए 10 वर्ष हो गए अब तो केंद्र की सरकार केवल दो लोगों के लिए काम करती दिखती है और कुछ लोग लगातार संविधान पर हमला करते ही हैं। यह कभी थमेगा जब जनता पूर्ण रूप से भाजपा को सत्ता से बाहर कर देगी।