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पंजाब में पराली तो एम पी में  नरवाई बनी समस्या 

धान-बाजरा फसल कटाई के बाद अब नरवाई (पराली) जलाने का दौर जारी है। अमूमन यह काम सुबह और शाम को होता है ताकि हवा के प्रभाव से आगे की लपटें चिंगारी गांव में या आसपास के घरों तक नहीं पहुंचें। किसानों को घरों का इतना ख्याल है लेकिन पर्यावरण के प्रति उनकी जागरुकता अब तक नहीं है। यही कारण है कि हर साल कृषि विभाग, जिला प्रशासन की समझाइश के बावजूद नरवाई जलाते ही हैं। इस बार भी ऐसा ही कर रहे हैं। गांवों में नरवाई जलाने के नाम पर न केवल पर्यावरण से खिलवाड़ किया जा रहा है बल्कि मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवों को खत्म करने में कसर नहीं रखी जा रही है। इससे खेतों में मृदा शक्ति कमजोर हो रही है। वहीं उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।