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22 तारीख के बाद भारत एक धर्म एक देव की ओर अग्रसर

बहूदेववाद से एकेश्वरवाद की और सनातन धर्म

24hnbc.com
बिलासपुर, 23 जनवरी 2024।
इस विश्लेषण को शुरू करने के पहले एक शब्द भक्ति का अर्थ समझना बेहद जरूरी है। भक्ति धाम की रसात्मक अनुभूति है। श्रद्धा और प्रेम के योग का नाम भक्ति है। सनातन धर्म के अनुसार जिन तीन तरीकों से ज्ञान ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग, कर्म मार्ग से ईश्वर के दर्शन प्राप्त किया जा सकते हैं। उनमें भक्ति मार्ग सर्वाधिक रसात्मक है अन्य दो मार्गो को यह विशेष प्रसाद हासिल नहीं है। पर 22 तारीख को जिस तरह के भक्त सड़कों पर दिखाई दिए, उनमें श्रद्धा और प्रेम गायब था। राम राज्य हमें वर्ण व्यवस्था की ओर ले जाता दिखाई देता है। जहां न्याय और समानता की कमी भी है। सनातन धर्म की संस्कृति और मान्यताएं बहूदेववादीकी है। हमारे आपके घर में कितना छोटा भी देव स्थान हो वहां शिवाजी, गणेश जी, लक्ष्मी जी, हनुमान जी, लड्डू गोपाल सब स्थान पाते हैं। पर 22 तारीख को इंडिया की यह धार्मिक विविधता भारत के एक धर्म एक देव में बदलती दिखाई दी। सनातन की राजधानी अयोध्या बन रही है जिन लोगों को भाषण देने का मौका मिला उसमें से एक गोविंद गिरी ने बगैर नाम लिए शंकराचार्य पर काफी कुछ कहा हमारे देश में सनातन धर्म मानने वाले माथे पर जो टीका लगाते हैं वह भी विविद हैं। तीन पट्टी का आडा टीका वैष्णव परंपरा है, सीधा टीका सैग परंपरा को मानता है, और एक बिंदी शाक्य परंपरा को मानता है। ऐसे में श्री राम का धार्मिक राजनीतिकरण समाज को विविधता की जगह एकेश्वरवाद की ओर ले जाएगा जो सनातन धर्म की मूल सोच से हटकर है। अब कई दिन तक भक्तों को अयोध्या दर्शन का क्रम प्रारंभ होगा इसी बीच लोक लुभावना बजट आएगा तब यह देखने लायक होगा कि एक साथ दो डीजे हाई वॉल्यूम पर कैसे बजाए जाएंगे। और लोक लुभावना डीजे राम धुन के साथ कैसे बजेगा।