24hnbc
आज का पंचांग 6 सितंबर 2022
- By 24hnbc --
- Monday, 05 Sep, 2022
24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
राहुकाल दोपहर 03 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तक। सुबह 09 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल सुबह 08 बजकर 33 मिनट से 09 बजकर 23 मिनट तक रहेगा इसके बाद मध्यरात्रि 11 बजकर 11 मिनट से 11 बजकर 57 मिनट तक। भद्राकाल दोपहर 04 बजकर 31 मिनट से अगले दिन सुबह 03 बजकर 04 मिनट तक।
राष्ट्रीय मिति भाद्रपद 15, शक संवत् 1944, भाद्रपद शुक्ल, एकादशी, मंगलवार, विक्रम संवत् 2079। सौर भाद्रपद मास प्रविष्टे 21, सफ़र 09, हिजरी 1444 (मुस्लिम), तदनुसार अंग्रेजी तारीख 06 सितंबर सन् 2022 ई०। सूर्य दक्षिणायण उत्तर गोल, शरद ऋतु।
राहुकाल अपराह्न 03 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तक। एकादशी तिथि अर्धरात्रोत्तर 03 बजकर 05 मिनट तक उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ। पूर्वाषाढ़ नक्षत्र सायं 06 बजकर 09 मिनट तक उपरांत उत्तराषाढ़ नक्षत्र का आरंभ।
आयुष्मान योग प्रातः 08 बजकर 15 मिनट तक उपरांत सौभाग्य योग का आरंभ। वणिज करण सायं 04 बजकर 30 मिनट तक उपरांत बव करण का आरंभ। चंद्रमा रात्रि 11 बजकर 38 मिनट तक धनु उपरांत मकर राशि पर संचार करेगा।
आज का व्रत त्योहार - पद्मा एकादशी व्रत (स्मार्त)
सूर्योदय का समय 6 सितंबर 2022 : सुबह 06 बजकर 01 मिनट पर।
सूर्यास्त का समय 6 सितंबर 2022 : शाम 06 बजकर 37 मिनट पर।
आज का शुभ मुहूर्त 6 सितंबर 2022 :
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 25 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। निशीथ काल मध्यरात्रि 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक। गोधूलि बेला शाम 06 बजकर 24 मिनट से 06 बजकर 49 मिनट तक। अमृत काल दोपहर 01 बजकर 45 मिनट से 03 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 06 बजकर 01 मिनट से शाम 06 बजकर 09 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 6 सितंबर 2022 :
राहुकाल दोपहर 03 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तक। सुबह 09 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल सुबह 08 बजकर 33 मिनट से 09 बजकर 23 मिनट तक रहेगा इसके बाद मध्यरात्रि 11 बजकर 11 मिनट से 11 बजकर 57 मिनट तक। भद्राकाल दोपहर 04 बजकर 31 मिनट से अगले दिन सुबह 03 बजकर 04 मिनट तक।
आज का उपाय : चमेली तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमानजी का लेपन करें और तिलक लगाएं। (आचार्य कृष्णदत्त शर्मा)


