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सीएम को बिलासपुर में क्यों करना पड़ रहा ध्वजारोहण

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बिलासपुर, 21 जनवरी 2026। 
आखिर उन समीकरणों और कारणों की व्याख्या तो होनी ही चाहिए जिनके चलते छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को गणतंत्र दिवस ध्वजारोहण के लिए बिलासपुर का चयन करना पड़ा। 2001- 2003 छत्तीसगढ़ के गठन के बाद जब अजीत प्रमोद योगी को राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया तो बिलासपुर का प्रशासनिक, राजनीतिक महत्व तेजी से बड़ा वे बिलासपुर में गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण करते रहे तभी छत्तीसगढ़ भवन का लोकार्पण भी उन्होंने किया। बिलासपुर से ही प्रदेश के मुख्यमंत्री, बिलासपुर से ही छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल यह दबदबा बिलासपुर के लोग भूले नहीं भूलते। उन 3 सालों में बिलासपुर जिले का विकास देखते ही बनता था। एक रात में कितना काम हो सकता है मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले इस पर चर्चा करते थे। जिले का राजनीतिक महत्व भी ईठला कर बोलता था। उनके बाद डॉक्टर रमन सिंह भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बने और 15 साल बिलासपुर में केवल बिलासपुर विधायक मंत्री अमर अग्रवाल की चली एक 5 साल का काल उसमें ऐसा भी है जब बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक विधानसभा अध्यक्ष बने और बिलासपुर में भाजपाई राजनीति के दो सत्ता केंद्र बन गए। खींचतान चरम पर रही पर एक बार भी डॉक्टर रमन ने छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री होते हुए बिलासपुर में गणतंत्र दिवस की परेड की सलामी नहीं दी। 
फिर आया कांग्रेस का शासन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बिलासपुर में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री को मिले यही बहुत था। सत्ता ने फिर करवट ली भारतीय जनता पार्टी का शासन फिर आया पर 5 साल का सुखा कायम है। बिलासपुर से कोई कैबिनेट मंत्री नहीं है कहा जा सकता है कि डिप्टी सीएम का सरकारी आवास तो बिलासपुर है पर सब जानते हैं वह मुंगेली जिले की लोरमी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के खाते में बिल्हा सीनियर नेता, बिलासपुर कद्दाबर नेता, बेलतरा युवा ओज और तखतपुर हर बाग का गुलाब पर किसी को विष्णु जी ने कैबिनेट के लायक नहीं माना एक बार मंत्रिमंडल में फिर बदल भी हुआ पर सब की लाॅवी धरी की धरी रह गई। इसी बीच लोकसभा चुनाव हुए बिलासपुर लोकसभा संसदीय सीट परंपरा अनुसार भारतीय जनता पार्टी के पास गई सांसद तोखन साहू को केंद्र में राज्य मंत्री का दर्जा मिला और यही से बिलासपुर जिले की राजनीति का परिदृश्य बदल गया। 
राज्य मंत्री तोखन साहू के पास जो विभाग है वहीं विभाग छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव विधायक लोरमी के पास भी है। दोनों नेता मूलतः मुंगेली की राजनीति से वास्ता रखते हैं और चेस बिलासपुर जिले में लगा दिया। इनकी राजनीति के बीच भारतीय जनता पार्टी के किसी विधायक की कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है जिन्होंने बनाने की कोशिश की सफल नहीं हुए। पिछले 3 महीने में ऐसे कई अवसर आए जब स्पष्ट हुआ कि भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी और प्रशासनिक खटपट जग जाहिर हुई। जिले में इस राजनीति के चलते भारतीय जनता पार्टी का नुकसान प्रारंभ हो चुका है। आदिवासी राजनीति, एससी राजनीति सांसद इंजीनियरिंग की राजनीति और नौकरशाहों की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की पकड़ ढीली पड़ रही है। स्मार्ट सिटी राजनीतिक खींचतान का परिणाम भुगत रही है। न्याय व्यवस्था तक पर इसकी आंच दिखाई दे रही है। केंद्र के संस्थान रेलवे, एनटीपीसी, सीईसीएल अपनी मर्जी के मालिक बन गए हैं, केंद्रीय विश्वविद्यालय ने भी बिलासपुर की छवि को नुकसान ही पहुंचाया। यहां तक की अटल यूनिवर्सिटी में भी समस्याएं कम नहीं है इन सब का बोरिया बिस्तर सीएम के पास पहुंच ही गया है उन्हें पता है बिलासपुर हाथ से गया तो राज्य हाथ से गया इसलिए पहले अधिकारियों की समीक्षा बैठक और अब सीधे बिलासपुर में परेड की सलामी लेकर वे इतना तो बात ही रहे हैं कि वे पूरे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं।