24hnbc
वर्तमान दौर ज्यादा दिन चला तो युवा स्वयं को नास्तिक घोषित करने लगेंगे
- By 24hnbc --
- Monday, 22 Dec, 2025
24hnbc.com
बिलासपुर, दिसंबर 2025।
2023 में भाजपा की छत्तीसगढ़ में सरकार स्थापित हुई आदिवासी चेहरा साय को मुख्यमंत्री बनाया गया सभी से छत्तीसगढ़ में विभिन्न पंथ, धर्म और समुदाय के बीच खींचतान सुनियोजित तरीके से बढ़ गई है। अभी हाल ही में आमाबेड़ा कांकेर इसका ताजा उदाहरण है। पहले तो दफन करने की प्रक्रिया को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ फिर एक समूह विशेष गांव का चर्च तोड़ने के आग लगाने की जो वीडियो फुटेज उपलब्ध है पुणे से स्पष्ट है कि चर्च के बाहर जो पुलिस बल था वह हमलावर भीड़ के सामने चुपचाप खड़ा था।
किसी का धर्म परिवर्तन यदि गलत है तो उससे बड़ा गलत कदम किसी के धार्मिक स्थान को नष्ट करना भी है। पर यह तो 2014 से 2025 का भारत है। यहां भीड़ द्वारा व्यक्ति की हत्या से लेकर धार्मिक स्थान को जमींदोज कर देना भी सहीषुणता का नया उदाहरण है। क्रिया की प्रतिक्रिया तो भारत के आदर्श राज्य गुजरात से होती थी। कल 24 दिसंबर को होने वाला छत्तीसगढ़ बंद तो एक तरह से विक्टिम कार्ड है। जिन्होंने एक धार्मिक स्थान को तोड़ दिया वो ही लोग पूरा छत्तीसगढ़ बंद कर आएंगे।
5 साल जब कभी भी राजनीतिक दल कांग्रेस ने राज्य बंद का आवाहन किया तो चेंबर ऑफ कॉमर्स ने समर्थन नहीं किया पर सत्ता परिवर्तन के बाद से जब कभी भी कांग्रेस के अतिरिक्त कोई भी बंद का आवाहन करता है। चेंबर उन्हें समर्थन देता है तब वह सब तर्क जो राजस्व क्षति को लेकर बताए जाते हैं। संस्कृति हित की रक्षा में तब्दील हो जाते हैं मानो एक दिन के लिए व्यापार पर संस्कृत हावी हो जाती है जबकि संस्कृति धर्म से बिल्कुल भिन्न प्रत्यय है। हर धर्म की एक संस्कृति है और उसका मान किसी अन्य से तोला नहीं जा सकता। भारत देश के अन्य राज्य जहां कहीं भी भाजपा का शासन है इस तरह से बदल रहा है की बाट बाट कर सत्ता को अक्षुण्ण कैसे रखा जाए तो प्रयोगशालाएं बढ़ रही है। कहीं आदिवासी को ईसाई से तो कहीं एससी को किसी अन्य से उलझाया जा रहा है।
बलौदा बाजार जिले के सरकारी कार्यालय जल गए जांच आयोग की रिपोर्ट आज तक नहीं आई अब कोई चर्चा भी नहीं करता है पर झीरम ज्ञान केंद्रीय मंत्री नड्डा को हो गया। 5 साल जांच कैसे ना हो इस टिकडम में भाजपा के नेता पिटीशन दर पिटीशन लगाते रहे और जांच को टरकाते रहे। तब भी केंद्र में भाजपा का ही शासन था कुल मिलाकर समाज में अविश्वास का एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जिससे सबक लेकर यदि युवा स्वयं को आने वाली जनगणना में नास्तिक घोषित करने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।


