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जनता ने छीनीं मोदी के हाथ से 303

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बिलासपुर, 5 जून 2024। 
जनता ने छीन ली मोदी की 303 अधिकांश लोग जानते हैं कि कुछ साल पूर्व तक पुलिस वालों के हाथ में जो राइफल हुआ करती थी उसे 303 के नाम से जाना जाता था। 2019 में जब भाजपा को 330 सीट लोकसभा में मिली तब किसी ने सोचा ही नहीं था कि भाजपा इस अंक का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धियों को धाराशाही करने के लिए करेगी। 4 जून 2024 देश में मतदाता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बताया कि हम संसदीय लोकतंत्र का अर्थ जानते हैं। देश का नेतृत्व कोई भी करें उसे संसद के प्रति जवाब दे बना होगा। अहंकार की सिर्फ हार हुई समापन नहीं हुआ, रीड की हड्डी की अकड़ अब स्पंजी हो जाएगी यह नीतीश ही नहीं चंद्रबाबू के सामने हर उसे संसद के सामने मुजरा करेंगी जिससे उन्हें वोट चाहिए। जरूरत पड़ी तो साधु का वेश धर लेंगे वे हार की नैतिक, राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं लेने वाले न ही संघ और भाजपा की चिंता करेंगे। अहंकार कितना भी दीर्घायु हो समय से मुकाबला नहीं कर सकता। आंकड़ों का खेल देखिए भाजपा ने 441 सीट पर प्रत्याशी उतारे थे सीधा अर्थ है अंदर कहीं यही सोच थी 370- 400 पार हो जाए। किसी की कोई जरूरत नहीं उसे मिले 240। कांग्रेस 328 जगह अपने प्रत्याशी उतारे उसे मिले 99 कांग्रेस ने अपनी अलायंस के लिए खूब सीट छोड़ी इस चुनाव में भाजपा के अतिरिक्त किसी राजनीतिक दल के पास उनके मुकाबले ना तो साधन थे। न धन ना अहंकार। सब अपने हौसले के साथ डेट थे। गोदी मीडिया अभी भी गोदी के मुकाबले राहुल प्रियंका की मेहनत को काम करके आक रहे हैं। उन्हें राहुल की दो भारत जोड़ो यात्रा दिखाई ही नहीं देती इन्हीं यात्राओं के कारण संविधान, अग्निवीर, किसान, महंगाई, बेरोजगारी, महिला अस्मिता चुनाव के मुद्दे बने। 
4 तारीख को दो लोग की हार हुई एक गोदी मीडिया और दूसरा चुनाव आयोग इस चुनाव के बाद पिछले सब चुनाव से हटकर एक बात और होगी हमारे देश में मतदाताओं के बीच एक विभाजन हो गया है। यह विभाजन 1947 के विभाजन से हटके है। इस बार धर्म और राजनीतिक पसंद के बीच मानसिक, भावात्मक विभाजन हुआ है और भाजपा और उसके नेता कभी भी इस विभाजन को खत्म करने की ओर नहीं उल्टे बढ़ाने की ही सोचेंगे।