पार्टी पर बने ये नेता बोझ
अब तो छोड़ दो पद
- By 24hnbc --
- Tuesday, 04 Jun, 2024
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बिलासपुर, 5 जून 2024।
हां हम बात कर रहे हैं बिलासपुर की कांग्रेस पार्टी के संगठन में बैठे दो पदाधिकारी की, पहला जिला ग्रामीण अध्यक्ष और दूसरा शहर अध्यक्ष इन दोनों के नेतृत्व में पार्टी की हर की एक श्रृंखला बन गई है। लगभग 6 माह बाद ही नगरी निकाय और फिर त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव होंगे। क्या इन्हीं के नेतृत्व में पार्टी हारने के लिए तैयार है कुछ ही दिन पहले विधानसभा चुनाव में जिले के भीतर मस्तूरी और कोटा विधानसभा सीट छोड़कर शेष सब स्थान पर कांग्रेस प्रत्याशी हारे। इसके पूर्व के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस की लहर थी तब भी जिले में केवल दो सीट बिलासपुर और तखतपुर छोड़कर शेष पर कांग्रेस हारी थी। तब भी जिला ग्रामीण का नेतृत्व विजय केसरवानी ही कर रहे थे उसके बाद उन्होंने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से एक पार्षद चुनाव जीता नगर पालिक निगम बिलासपुर की एमआईसी में आ गए। कांग्रेस की सरकार थी खूब भौकाल काटा बेलतरा से टिकट भी ले आए। मेयर ने ही कई करोड़ की डील का बयान दिया। राज्य में कांग्रेस डूबी बेलतरा सीट पर भी विजय केसरवानी हरे पर उन्होंने अपने प्रदेश अध्यक्ष के सामने इस्तीफा नहीं रखा। कई बार यह बात आई की बिलासपुर कांग्रेस संगठन में फेरबदल होगा पर नहीं हुआ। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि कोई कांग्रेस के इस कर चरमराते हुए संगठन की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता पर अब तो बदलाव करना ही होगा। स्थानीय निकायों के चुनाव दूर नहीं है।
बिलासपुर लोकसभा में बिलासपुर से भाजपा प्रत्याशी को विधानसभा के मुकाबले बड़ी जीत हासिल हुई। भाजपा कांग्रेस के बीच 52432 का अंतर है जबकि विधानसभा में कांग्रेस का प्रत्याशी लगभग 29000 वोट से हारा। कोटा में भी जहां कांग्रेस का विधायक है वहां देवेंद्र यादव 15000 मतों से हारे यहां एक बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी की संविधान बचाओ, अग्नि वीर, बेरोजगारी, उद्योगपतियों की लूट जैसे मुद्दे काम नहीं आते कहीं ना कहीं कमी बिलासपुर कांग्रेस के भीतर ही हैं।
भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी तोखन साहू जो मुंगेली जिले से वास्ता रखते हैं को अपने गृह क्षेत्र लोरमी से केवल 482 मतों से लीड़ मिलती हैं इस विधानसभा का नेतृत्व प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव करते हैं। पर भाजपा के जी नेता को उसी के क्षेत्र में इतनी कम बढ़त मिलती है उसे बिलासपुर में 55000 जैसी धमाकेदार लीड मिलती है। क्या जिले के मतदाताओं को मोदी का चेहरा इतना पसंद है या यह कांग्रेस संगठन की कमजोरी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के भीतर कांग्रेस को अपनी कार्यशैली में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। अन्यथा बिलासपुर कांग्रेस पार्टी के लिए लाईलाज बीमारी है।


