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महादेव ऐप चिटफंड पीएससी घोटाला, नागरिक के हिस्से केवल सिर पटकना

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बिलासपुर, 9 फरवरी 2024।
चिटफंड घोटाला हो या महादेव ऐप प्रदेश की नागरिक के भाग्य में केवल ठगा जाना है। पूरे राज्य में पिछले 1 साल से महादेव ऐप की चर्चा है। जनवरी 2020 में पहली बार डिजिटल तरीके से चल रहे इस सट्टे का उल्लेख राज्य के समाचार पत्रों में होने लगा था। भिलाई से शुरू हुआ यह सट्टा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नाम कमा चुका 100 करोड रुपए रोज का गेम बताया जाता है। कल छत्तीसगढ़ विधानसभा में फिर से इस विषय पर चर्चा हुई विधायक राजेश मूणत अपने ही सरकार के गृह मंत्री जो सरकार में उपमुख्यमंत्री भी है के जवाब से असंतुष्ट नजर आए।
ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग के नियम पहले के मुकाबले बहुत सख्त हैं। महादेव ऐप को विधानसभा चुनाव के समय भी भारतीय जनता पार्टी ने महत्वपूर्ण बनाया यहां तक की धीरे-धीरे उसे समय के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम लेकर आरोप लगे के आप किसी छोटे-मोटे नेता ने नहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पत्रकार वार्ता लेकर लगाएं। कांग्रेस के 5 साल के कार्यकाल में भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस के कई मंत्री भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की सरपरस्ती में चल रही चिटकनी कंपनी घोटाला की चर्चा करते थे। आरोप लगाते थे कहते थे चिटफंड कंपनी के कार्यक्रमों में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री और बड़े नेता शामिल होते थे। कंपनियों ने राज्य के छोटे-छोटे गांव में भी एजेंटो के माध्यम से पैसा एकत्र किये, झूठे वादे किये, और करोड़ों रुपए ठग लिए बाद में कंपनियों के संचालक फरार हो गए सरकार ने कहा एक-एक निवेशक का पैसा वापस करेंगे सबके साथ न्याय होगा चुनाव के पहले हजारों निवेशकों ने क्लेम फॉर्म भरकर जमा किए आज भी धूल खा रहे हैं। महादेव ऐप और चिटफंड घोटाला इस मायने में एक समान है कि दोनों को उनके समय की सरकारों ने संरक्षण देकर रखा था। 
कल की विधानसभा कार्यवाही के दौरान वरिष्ठ विधायक धरमजीत सिंह ने कहा चार्ट फ्लाइट से जाओ योगी दरबार से बुलडोजर लाओ और न्याय करो। पता नहीं विधानसभा के भीतर पूरी जिम्मेदारी के साथ एक विधायक इस तरह बुलडोजर न्याय का आह्वान करता है और उसकी आलोचना नहीं होती। ऐसा ही चला तो छत्तीसगढ़ में कभी चिटफंड घोटाला तो कभी महादेव होता रहेगा। एक ऐसा राज्य जिसमें 2003 के बाद ऐसे एक भी पीएससी की परीक्षा और उसके परिणाम निर्विवाद घोषित नहीं हुए। मामला सिर्फ 2023 की पीएससी का नहीं है उसके पूर्व भारतीय जनता पार्टी शासनकाल में जितनी पीएससी हुई सब की नियुक्तियां जांच के घेरे में रही एक पीएससी के मामले में तो छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट निर्णय भी दे चुका है जिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी है उन्हें आईएएस अवार्ड हो चुका है। मामला उच्चतम न्यायालय से स्टे पर है। हमने बनाया हम ही सवारेंगे केवल नारा है नागरिकों के हिस्से कभी जुमले तो कभी भरोसा तो कभी गारंटी.....।