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आजादी का अमृत महोत्सव जहर पीने मजबूर है जनता

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 1 अप्रैल 2022। आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और जनता महंगाई का जहर पीने मजबूर है। ध्यान देने योग्य बात है कि हमारा वित्तीय वर्ष अप्रैलफूल से प्रारंभ होता है संयोग यह है कि इस बार नव हिंदू वर्ष उगादि भी हम अप्रैलफूल के बाद मना रहे हैं। सरकार सब कुछ बेचने पर आमादा है और योग गुरु रामदेव यादव जनता को सीख दे रहे हैं कि और मेहनत करो और मेहनत करो कमा के अपना नहीं सरकार का पेट भरो । पिछले 2 साल में सरकार का विनिवेश फेल है। डीमोनेटाइजेशन फेल है, प्राइवेटाइजेशन भी फेल है, मोनेटाइजेशन फेल है अब सरकार की पूरी नजर जमीनों को बेचने पर है जमीन ने बिकेगी, पावर फैक्टर की रेलवे की डिफेंस की और दूरसंचार की 9 मार्च को केंद्र सरकार ने एनएलएमसी नाम की कंपनी का निर्माण किया इसके पहले दीपंम, एनआईआईएफआईएन, एनएमपी नाम की चार कंपनियां सेल सेल सेल काम पर लगी थी और फेल फेल फेल हो रही थी। अब सेल का काम पूरी तरीके से आउटसोर्सिंग से होगा इस बीच में सरकार ने टैक्स का दायरा और बढ़ा दिया है पीएफ पर ढाई लाख से ज्यादा पर टैक्स लगेगा, क्रिप्टो पर 30% टैक्स है, 800 जीवन रक्षक दवाएं महंगी कर दी गई है, 20 लाख से ज्यादा के धंधे वालों को जीएसटी का इनवॉइस डिजिटल ही रखना पड़ेगा। सरकार 1 लाख 75 हजार करोड रुपए निजी करण से कमाने का लक्ष्य रखी थी बाद में इसे घटाकर 78 हजार करोड किया गया। जब यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ तब इसे 45 हजार 485 करोड़ कर लिया गया अब इस वर्ष के लिए 65 हजार करोड़ रुपए लक्ष्य निर्धारित है। केंद्र सरकार अब विभिन्न सरकारी कंपनियों की बेंगलुरु, मैसूर, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद जैसे शहरों में फैली हुई 18 लाख एकड़ जमीन को बेचना चाहती है। कंपनियां अभी तक कंपनियों ने एक विशेष रणनीति के तहत सरकार के द्वारा बेची जा रही कंपनियों को खरीदा है जितने रुपए में खरीदी हुई खरीदने वालों ने 60% रकम सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों से लोन के रूप में ली और धीरे-धीरे देश में 1000 से अधिक कंपनियां दिवालिया हो गई ले देकर पैसा आम जनता का ही लग रहा है तभी अनुलोम विलोम कराने वाले अब यह कह रहे हैं कि जनता और मेहनत करें मेहनत करेगी यदि पैसा पा गई तो मजबूरन बैंक में जमा करेगी और बैंक में जमा रकम से शातिर उद्योगपति लोन लेकर सरकार के द्वारा बेची जा रही चीजों को खरीदेंगे और बाद में दिवालिया हो जाएंगे लगता है आजादी का अमृत महोत्सव यही है कहते भी हैं जब तक बेवकूफ जिंदा है तब अकलमंद भूखे नहीं मरते तो यहां पर आवाम बेवकूफ है और सरकार अकलमंद।