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क्या 1 ही परिवार से 3 सदस्य बनेंगे निर्वाचित जनप्रतिनिधि, महंत जी ने यूं ही नहीं किया है राज्यसभा का दावा....

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष ने कल बिलासपुर में राज्यसभा सीट के लिए अपनी दावेदारी ठोकी। कम लोग को ही यह पता है कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही दो राज्यसभा सीटें खाली होने वाली हैं। इसमें से एक सीट बीजेपी कोटे से और एक सीट कांग्रेस कोटे से खाली होगी। अब यह समझे कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे सुरक्षित संवैधानिक पद पर बैठे श्री महंत को राज्यसभा सीट पर दावा क्यों जताना पड़ रहा है जबकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का जबरदस्त बहुमत है और सरकार को कोई खतरा भी नहीं है। 
सबसे पहले यह बताना जरूरी है कि श्री महंत सक्ति विधानसभा सीट के विधायक हैं और उस क्षेत्र में उनके पुत्र का बैनर पोस्टर जिस संख्या में इन दिनों दिखाई देते हैं स्पष्ट होता है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में वह टिकट का दावा करेंगे । श्री महंत की पत्नी कोरबा लोकसभा से सांसद है। अब महंत जी राज्यसभा का दावा कर रहे हैं मतलब एक परिवार के तीन सदस्य तीनो लोकसभा, राज्यसभा व विधानसभा में पहुंच सकते हैं। इसे अब्बल दर्जे का परिवारवाद ही कहा जाएगा। छत्तीसगढ़ में इतना सशक्त परिवारवाद तो दिवंगत नेता अजीत जोगी का भी नहीं था। अब यह समझे कि यदि महंत राज्यसभा सदस्य बन जाए तो कभी भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं और मुख्यमंत्री रहते हुए उप चुनाव जीतना बेहद आसान होता है कांग्रेस में ऐसे कई नेता है जो राज्यसभा से मुख्यमंत्री बन गए। राज्यसभा के लिए उन्होंने जब अपनी मंशा जाहिर की है तब यह भी देखा जाना चाहिए कि छत्तीसगढ़ राज्य में बड़े नेता कौन हैं और उन नेताओं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री से कैसकैसी पटती है। 
सबसे पहले श्री महंत का ही समीकरण सीएम से इन दिनों ठीक नहीं बैठता सूत्र बताते हैं कि सक्ति जिला बनने की राय पर दोनों के राय भिन्न-भिन्न थी और यह बात सीएम हाउस में एक मीटिंग को संबोधित करते सीएम साहब ने स्वयं ही बता दी। कद्दावर मंत्री टी एस सिंहदेव के मुख्यमंत्री जी से कैसे संबंध हैं उस पर वैसे भी काफी कुछ कहा जा चुका है। पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर जो कि होम मिनिस्टर भी हैं इन दिनों बेहद शांत हैं बताया जाता है कि उनकी शांति के पीछे भी कुछ नाराजगी ही हैं राज्यसभा सीट पर किसी बड़े नेता और एक के गुट के छत्रप को भेज देना या भेजने में मदद कर देना दिल्ली में अपने विरोध के लिए एक नया समीकरण बिठालने के समान हैं और ऐसी गलती शायद ही कोई मुख्यमंत्री करें छत्तीसगढ़ बने 21 साल से अधिक हो रहा है आज तक कभी भी एक विधानसभा ने दो अध्यक्ष नहीं देखे यदि महंत जी राज्यसभा चले गए तो छत्तीसगढ़ के लोग यह भी देखेंगे हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए चुनाव जीतना आसान नहीं होता।