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गांजा और देह व्यापार मिलकर बजा रहे शहर की बैंड
- By 24hnbc --
- Sunday, 26 Apr, 2026
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बिलासपुर, 27 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य का राजधानी के बाद सबसे महत्वपूर्ण शहर बिलासपुर क्यों महत्वपूर्ण है इन पर चर्चा कभी बाद में अभी दो मुद्दे महत्वपूर्ण है। शहर में बढ़ता हुआ गांजे का सफल व्यवसाय और दूसरा शहर के हर कोने में आकर ले चुका दे व्यापार एक के बाद एक दोनों पर नजर डालते हैं।
पटरी के उसे पर अर्थात सिरगिट्टी क्षेत्र में गांजा बेचने वाले और कंज्यूम करने वाले दोनों पर नजर रखने के बाद यह तथ्य स्पष्ट होता है कि यहां रोज कम से कम 4 किलो गांजा की खपत हो जाती है। शहर के जिन खास क्षेत्र में गांजा आराम से उपलब्ध हो रहा है उसमें रेलवे और उसे लगी हुई कॉलोनियों विशेष कर दयालबंद और देवरी खुर्द का क्षेत्र, तालापारा, मगर पारा, मंदिर चौक, सरकंडा, चांटीडीह, चिंगराज पारा, उसलापुर, अमेरी, घूरु से लेकर यदुनंदन नगर तिफरा तक गांजा सुबह ब्रह्म मुहूर्त से देर रात 2- 3:00 बजे तक आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। गांजा धंधे से जुड़ा दूसरा मामला इस व्यवसाय की आड़ क्या है। पूरे 12 महीने ना बिकने वाला मटको की दुकानें, मुर्गी संघ, झाड़ू, झाल, टोकरी का धंधा एक मोहल्ले से ऊपर उठकर बात करें तो बिलासपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में ही रोज 40 किलो से अधिक गांजा बिक्री हो जाता है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि हर उपभोग की वस्तु के समान गांजे में भी नकली गांजा मिलावटी गांजा बड़े आराम से बचा जा सकता है। अर्थात गंजे की सूखी पत्तियां ही मिलावटी होती है जैसे मिल्क केक में असली से नकली मिलकर केक ज्यादा स्वादु है। वैसे ही नकली गांजा असली से ज्यादा नशा करता है।
अब दूसरा विषय जहां चाहे वहां देह व्यापार के लिए इच्छा करने मात्र की जरूरत है और वास्तु पाई जा सकती है। शहर का ओपन देह व्यापार भी सुबह 8:00 बजे से उपलब्ध है और देर रात 1- 2 बजे तक चलता है। इससे जुड़ी हुई तीन बातें मुख्य है। समाज में काम है या नहीं, काम है तो दाम क्या है और तीसरा कौन है जो इन कामों को छोड़कर दे व्यापार के लिए मर्जी से तैयार है जो युवतियां बालिक से प्रौढ़ तक इस धंधे में लगी है। इसमें युवा अवस्था की लड़कियों में से अधिकतर बहार की हैं। दाम जैसा मांगो 500 से आमतौर पर₹2000 तक का व्यापार सहजता से चल रहा है। ना स्थान की कमी है ना वस्तु की और ना ही ग्राहक की इन दो धंधों ने मिलकर बिलासपुर शहर की बैंड बजा दी है। क्योंकि यह कहने की जरूरत ही नहीं है कि नशे के कारोबार के कारण हिंसा अपराध बढ़ रहा है।


