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अरे कंट्रोल रूम को भी कोई कंट्रोल करता होगा, यही है कालचक्र

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बिलासपुर, 16 फरवरी 2026। 
6 बोतल बियर पर प्रहार करने वाली बिलासपुर पुलिस के यातायात विंग के कुछ नाम एक सफेद कागज पर नीली और लाल स्याही से लिखे गए हैं। उन नाम के साथ ट्रैक्टर, हाईवे जैसे वाहनों का नाम भी अंकित है। हम इस नाम की सूची की वास्तविकता नहीं जानते पर यह हकीकत है की यातायात पुलिस बिलासपुर में कुछ नाम इस तरह अंकित है जैसे उन्होंने स्थाई पट्टा ले रखा हो। समय-समय पर उनके कारनामे भी गूंजते हैं। ये स्थाई चेहरे पुराना बस स्टैंड, नेहरू चौक, हाई कोर्ट रोड, सरकंडा और देवरी खुर्द क्षेत्र में अपने निश्चित काम करते हैं। कर्तव्य परायणता के लिए इन्हें निश्चित ही कोई बड़ा पुरस्कार मिलना चाहिए। 
रेत से लदे ट्रैक्टर ट्राली, सब्जी से लगे मैजिक वाहन, कि इन्हें पीएचडी है। किस वाहन से मिला कितना मिला कितना अगली ईएमआई कब आएगी सब का इन्हें मुखाग्रि याद है। कहते हैं इन नाम को चौराहों पर इतनी मानता है कि किसी अन्य की ड्यूटी होने पर यदि ड्राइवर पकड़ा जाता है तो वह संबंधित मुखिया को फोन पर संपर्क करता है और एनओसी प्राप्त हो जाती है। इसे बगैर एआई का जुगाड़ कहा जाता है। साहब कोई भी आए जाए पर इनका चीप मदरबोर्ड से कोई नहीं उखाड़ सकता। चाहे इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम बने, ईओडब्ल्यू बने, या पांडे जी सुबह से उद्घोष करें। पर इसे ही वह व्यवस्था कहा जाता है जो अनादी है और समय के साथ परिष्कृत हो रही है। इतनी शानदार व्यवस्था का कोई फ़ाइल नाम नहीं है।