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वसीयत कुछ आवेदन कुछ फिर भी मर्जी का आदेश चाहते हैं आवेदक

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बिलासपुर, 5 फरवरी 2026। 
रतनपुर तहसील कार्यालय का एक फावति नामांतरण प्रकरण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आवेदक महिला है पर पूरे मामले में एक जायसवाल नाम के नेता अति सक्रिय हैं वे तहसीलदार पर भारी भरकम आरोप लगा रहे हैं। समाचार के साथ आवेदन पत्र का वह हिस्सा जिसमें रकवा, खसरा नंबरों का उल्लेख है का स्क्रीनशॉट लगाया जा रहा है। संशोधन का आधार पंजीकृत वसीयतनामा मोती चंद पिता कपिल नाथ का पंजीकृत वसीयतनामा 27 दिसंबर 2023, मृत्यु दिनांक 20 अगस्त 2025 को बनाया गया है वसीयत की कापी का स्क्रीनशॉट भी समाचार के साथ है।
आवेदक ने प्रार्थना पत्र में जिन रकवा , खसरा का हवाला दिया है और नाम परिवर्तन करना चाहा है उन खबरों का उल्लेख वसीयतनामा में नहीं है। अर्थात वसीयत के खसरे और आवेदन पत्र के खसरे भिन्न-भिन्न है। ऐसे में कौन पीठासीन अधिकारी आवेदन पत्र को निरस्त न करें। यहां एक अन्य बात भी महत्वपूर्ण है स्वर्गीय मोतीचंद रतनपुर मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी थे उन्होंने अपने ट्रस्टीसीप का उत्तराधिकारी मुन्ना तंबोली नाम के व्यक्ति को दिया तब भी रतनपुर ट्रस्ट ऑफिस के बाहर जोरदार नेतागिरी हुई थी। भरपूर प्रयास किया गया था कि मुन्ना तंबोली रतनपुर मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी न बन पाए। कुल मिलकर ऐसा लगता है कि आवेदन पत्र पेश होने के बाद ही भरपूर दबाव बजाया गया कि रिकॉर्ड दुरुस्तिकारण हो जाए पर वास्तविक तथ्यों के कारण आवेदन पत्र निरस्त हो गया। नेतागिरी काम नहीं आई और अब लकीर पीटी जा रही है।