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जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बहुत कुछ अस्पष्ट
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बिलासपुर, 5 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य में शराब अब प्लास्टिक की बोतलों में मिलेगी। इस निर्णय के कुछ ऐसे आयाम है जिन पर कैबिनेट ने विचार नहीं किया लगता है। कांच की बोतलों में शराब बिकती रही और कांच की खाली बोतलों का एकत्र करना उन्हें साफ करना धोना एक बड़ा बाजार है और हजारों महिलाएं इस काम पर लगी है और इसी कमाई से उनका घर चलता है। सब का रोजगार चीन वाला है सरकार ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया एक मुद्दा स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी है। शराब प्लास्टिक से कुछ ऐसे केमिकल को घोल लेती है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। अधिक समय तक बोतल में शराब पड़ी रहेगी तो यह समस्या और बढ़ेगी। माइक्रो प्लास्टिक और कुछ केमिकल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
2019 में यह फैसला लिया गया था पर पर्यावरण के संकट को मानते हुए पीछे हट जाना ही बेहतर माना गया। राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उड़ीसा में प्लास्टिक में प्रतिबंध लगा रखा है और कांच की बोतलों में ही शराब बिकती है। शराब निर्माता के लिए प्लास्टिक आसान व सस्ता है कीमत में 30% तक की कमी आएगी पर इसका लाभ तो सरकार ही लेगी। प्लास्टिक की बोतल में शराब प्लास्टिक की बोतल में बिकने वाले कोल्ड ड्रिंक को याद करें कुछ कोल्ड ड्रिंक पर तो स्पष्ट लिखा है सीधे सूर्य की रोशनी से बचाए और अंदर भरा द्रव्य सीधे सूर्य की रोशनी में ना आए इसके लिए प्लास्टिक की बोतल का कलर भी बदल दिया जाता है। पर छत्तीसगढ़ में कैबिनेट का फैसला जल्दबाजी में लिया गया लगता है। केरल में 80% शराब प्लास्टिक की बोतल में है। कुछ राज्य में 90 मल की शराब प्लास्टिक में और उससे अधिक वाली के लिए कांच केरल और तमिलनाडु में तो प्लास्टिक की बोतल वापस कर देने पर कुछ राशि नगद वापस कर दी जाती है। प्लास्टिक के कचरे बोतलों का डिस्पोजल के संदर्भ में सरकार ने कोई पॉलिसी नहीं बताई है हो सकता है अप्रैल फूल के दिन बता दी जाए।


