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ढाबों में शोषण पर श्रम विभाग का मौन

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बिलासपुर, 4 फरवरी 2025। 
एक समय था जब बाल श्रमिक को से काम करना दुकानदारों को सिर दर्द लगता था। डरते थे कानून कड़ा था। फिर सरकार ने आयु की छूट दी अब तो बिलासपुर रायपुर रोड के ढाबों में कम आयु के श्रमिक की बाढ़ है और सब ढाबा मालिक के रिश्तेदार हैं। ये दो तर्क कानून से बचाव का रास्ता है श्रमिक यदि गरीब परिवार से है तो और अच्छा यदि कोई दुर्घटना हो भी गई तो इलाज का वादा और थोड़ी सी राशि श्रमिक के अभिभावक को मुंह बंद रखने के लिए एक ऐसी ही घटना भोजपुरी टोल प्लाजा के पास एक ढाबे में हुई पूरा मामला बिलासपुर जिला के क्षेत्राधिकार अंतर्गत आता है। थाना क्षेत्र हिर्री है दुर्घटना में घायल का इलाज बिलासपुर के एक बर्न अस्पताल में चल रहा है।
दिन प्रतिदिन बीतता जाता है ढाबों पर श्रम विभाग के किसी कर्मचारी के पर ही नहीं पड़ते हैं। इतना ही नहीं जो ढाबे रेस्टोरेंट स्तर पर बदलकर बड़े हो गए उनमें एक दर्जन से अधिक महिला स्टाफ काम करती है पर श्रम विभाग को इन कर्मचारियों की कोई जानकारी नहीं है। नई गाइडलाइन के अनुसार इन ढाबों में कोई समिति भी नहीं बनी अगर मामले को मानव श्रम से हटकर फूड लाइसेंस और खाने की गुणवत्ता, मात्रा और कीमत के दायरे में लाया जाए और ढाबों में सैंपल एकत्र किया जाए तो दर्जनों ढाबों के प्रकरण कोर्ट में नजर आएंगे। कई की खाद्य सामग्रियां मिलावट से भरपूर स्तरहीन पाई जाएगी। यह बात बिलासपुर के आसपास किसी भी रोड पर संचालित धब्बों की है। महिला श्रमिकों को भी न्यूनतम दर से पेमेंट नहीं किया जाता।