युवाओं का ट्रिगर पॉइंट नहीं झेल पाए चाणक्य
दो धारी तलवार से खेल रही केंद्र सरकार
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बिलासपुर, 29 जनवरी 2026।
2014 के बाद देश में पहली बेरोजगारी और सफल नीतियों पर कहीं युवाओं का ट्रिगर पॉइंट दब न जाए के डर से केंद्र सरकार के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में आज हथियार डाल दिए और सवर्णों को उनकी याचिकाओं पर यूजीसी के नए नियमों पर स्टे हो गया। नए नियम 2019 में दाखिल एक याचिका के बाद ले गए थे जिसे पायल तडवी और रोहित वेमुला की मां आवेदन तलीम तडवी और राधिका वेमुला ने दायर किया था। याचिका में उन्होंने पहले के सामान्य संबंधी नियमों के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए थे दोनों रिसर्च स्कॉलर ने कई बार जातिगत भेदभाव झेलने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
13 जनवरी को यूजीसी ने नई गाइडलाइन जारी की थी और आज 29 जनवरी 2026 को नवीन जिंदल, मृत्युंजय तिवारी और राहुल देवन द्वारा दायर 3 रीट याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय के सीजेआई और एक अन्य जस्टिस बची की डीबी ने स्टे आर्डर दे दिया। यूजीसी के नए नियम अब 19 मार्च तक स्थगित रहेंगे। 19 मार्च को अगली सुनवाई है कई लोगों का मानना है कि सरकार ने एक तरफ यूजीसी की गाइडलाइन जारी कराई सामाजिक न्याय की दुहाई दी और दूसरे दरवाजे से उसे स्टे कर दिया।
एक सांसद शशिकांत दुबे का एक ट्वीट महत्वपूर्ण है सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो मैंने कहा ऐसा लगता है कि सरकार के खिलाफ इन दिनों जिस तरह का आंदोलन खड़ा हो रहा था उसे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला बड़े आंदोलन की संभावना को रोक देगा।
बिलासपुर का ही उदाहरण लें केंद्रीय विश्वविद्यालय में एससी/एसटी छात्रों के उत्पीड़न की खबरें कई बार बाहर आती है पर उन पर जांच के नाम पर अभी तक कोई कार्यवाही होते नहीं दिखी। ऐसे में यूजीसी की गाइडलाइन के बाद कुछ प्रभावित होते दिख रहा था पर सवर्णो के आंदोलन से सरकार यू डर जाएगी की उम्मीद कई लोगों को थी। पर इसके पूर्व कृषि बिल, श्रम सुधार, किसान आंदोलन यहां तक की एसआईआर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार ने हर फोरम पर अपने बात तगड़े से राखी और इस बार गुलाटी मार दी कारण यही है कि सरकार युवाओं के ट्रिगर प्वाइंट से डर गई उसे अपने सवर्ण वोट बैंक की चिंता हो लगी।


