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दो स्टे के बीच कैसे नष्ट की गई विरासत

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बिलासपुर, 12 नवंबर 2025। 
बिलासपुर स्थित जेकमेन मेमोरियल अस्पताल बिलासपुर ही नहीं छत्तीसगढ़ के इतिहास में अपनी खास जगह रखना है। इसकी न्यू स्वतंत्रता से पूर्व रखी गई और सेवा काल भी पूरे 100 साल से ज्यादा का है। पर 2024 से 12 एकड़ के भूखंड पर जिला प्रशासन की नजर पड़ गई और इस स्मार्ट सिटी का बजट और उसका अहंकार सेवा और समर्पण के 100 की साल की विरासत पर भारी पड़ गया। 
पहले नजूल न्यायालय से लीज नवीनीकरण रद्द हुआ। संभाग आयुक्त के न्यायालय से स्थगन हुआ परिणाम आयुक्त का तबादला हुआ। नए आयुक्त के अदालत में सरकार की जीत हुई और जीत होने के बाद सरकार का तोड़ू दस्ता परिसर में घुस गया। जब तक उच्च न्यायालय का स्थगन आता मुख्य भवन को आधा धारासाही किया जा चुका था और एक अन्य भवन पर निगम ने अपना विस्तार कार्यालय खोल दिया। सिंगल बेंच में फिर सरकार की जीत हुई और डीबी में कुछ ही दिन के भीतर याचिकाकर्ता हार गया। यदि मानवीय दृष्टिकोण से पीठ चाहती तो याचिकाकर्ता को इतनी राहत तो प्रदान की ही जा सकती थी कि उन्हें एक समय विशेष की मोहलत देते और उसे समय सीमा के भीतर जिला प्रशासन को तोड़फोड़ से रोकने पर यह नहीं हुआ और 10 तारीख के निर्णय का दाम लेकर निगम प्रशासन ने 11 नवंबर और 12 नवंबर को खूब मनमर्जी की जब तक सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन आता 100 साल की सेवा समर्पण की विरासत को ध्वस्त किया जा चुका था। अब स्टेटस के आदेश को तकिए के नीचे रखकर याचिकाकर्ता और परिसर के निवासी केवल रो सकते हैं।