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गौस और जेकमेन का यहोदा कौन....?
- By 24hnbc --
- Tuesday, 11 Nov, 2025
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बिलासपुर, 11 नवंबर 2025।
11 तारीख को जेकमेन मेमोरियल मिशन अस्पताल पर पूरी तरह से सरकार का कब्जा हो गया। बड़ी निजी योजनाओं को भूमि आवंटन होगी और सब कुछ बाजार की ताकते नियंत्रित करेगी। सेवा और अन्य नैतिक मूल्य भी क्रोनी पूंजीवाद की भेंट चढ़ गई। प्रश्न उठता है कि जब आधा बिलासपुर नजूल पर बसा है तो बड़े भूखंड के लीज होल्डर चैन से कैसे बैठे हैं। आखिर सामान्य भाषा में जिन्हें जयचंद कहा जाता है ईसाई धर्म में वही भूमिका पतरस ने निभाई तो छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत का पतरस कौन है।
सैकड़ो चर्च एक दर्जन से ज्यादा स्कूल कई अस्पताल छत्तीसगढ़ में सेवा, प्रेम विश्वास की गाथा लिए है। इस सब में सेंध किसने लगाई। रायपुर का जाना अनजाना इतिहास ग्रॉस मेमोरियल बिलासपुर का जेकमेन मिशन कैसे सैकड़ो साल के इतिहास को भूल गया। जिस पीढ़ी के पतरस ने इस काम को अंजाम दिया उसे कैसे भूल जा सकता है। छत्तीसगढ़ डायोसिस पर ऐसे नेतृत्व का कब्जा है जिसके लोकस को कमिश्नर से लेकर उच्च न्यायालय की डीबी तक ने स्वीकार नहीं किया। जब नजूल न्यायालय बिलासपुर ने जेकमेन मेमोरियल अस्पताल की लीज निरस्त की और सीडब्ल्यूबीएम के नए डायरेक्टर के रूप में अपंजीकृत डायोसिस के अवैतनिक सचिव मैं आगे की कानूनी लड़ाई में आवेदन पत्र प्रस्तुत किये तब 24 hbbc स्पष्ट लिखा था। पावर ऑफ अटॉर्नी विधि शून्य हैं और आवेदक का लोकस नहीं है।
यह बात हर फोरम पर सच निकली आखिर ऐसे नेतृत्व को समाज (डायोसिस) नेक कैसे और क्यों किसके इशारे पर स्वीकार कर रखा है। इन पर इसके साथियों पर जिसमें बिशप भी शामिल हैं। पांच से अधिक एफआईआर कायम है और यह अपनी लड़ाई को सामाजिक हित में बताते हैं। आज नहीं तो कल ईसाई समाज के सदस्य समझेंगे कि यहोदा को किसने बैठाला, क्यों बैठाला यह तो दिख रहा है।


