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17 जून की एक एफआईआर कोटा थाने के लिए बन गई सरदर्द

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बिलासपुर, 16 जुलाई 2024।
17 जून को कोटा थाने में जो एफआईआर दर्ज हुई है। उसके आरोपों को मस्तूरी थाने ने पकड़ा था और नियम अनुसार कोटा थाने पहुंचा दिया। 18 जून शाम 5:00 बजे तक नामजद आरोपी कोटा थाने में रहा और बाद में सूर्यास्त के बाद उसे वहां से विदाई दे दी गई। 
17 जून की इस एफआईआर के कारण खरगहनी और पत्थर्रा के किसान उहापोह में उन्हें डर सता रहा है कि पुलिस कभी भी उन्हें नामजद आरोपियों के बयान के आधार पर आरोपी बनाकर जेल ना भेज दें। दबी जुबान से कुछ नागरिक यह भी कहते हैं कि मुख्य आरोपी और वर्तमान टीआई की वर्ग एक हैं। अतः आपस में वर्ग मित्रता निभा रहे हैं। 
नामजद आरोपी परजीवी वर्ग के बताए जाते हैं। पहले इन्हें आंदोलन जीवी कहा जाता था। बताया जाता है कि बोर्ड की राजनीति के चक्कर में हाल ही मंत्री बने एक नेता ने इस मामले में पुलिस विभाग को फोन पर कुछ निर्देश भी दिया था। कुल मिलाकर कोटा थाने की स्थिति कुएं के मुंडेर पर बैठने वाली हो गई है। ग्रामीण जन किसी भी दिन बड़ी संख्या में एकत्र होकर गिरफ्तारी देने भी जा सकते हैं।