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सत्ता परिवर्तन के बाद नेता को केवल फोटो बदलने में है दिलचस्पी

कौन आली बाबा कौन 420, एपीएल को बीपीएल में बदलने के लिए संगठित गिरोह करता है काम

24hnbc.com
बिलासपुर, 28 मई 2024।
शहर के पेशेवर राशन दुकान द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट (एआई) के माध्यम से सरकार की योजना को लग रहे हैं पतिला । 2011 के बाद कभी बीपीएल सूची का नाम तो परीक्षण हुआ ना ही नई परिस्थितियों के बाद हो गए, गरीबों का नाम इसमें जोड़ा गया पर राज्य सरकार ने ऐसे बहुत से सुराख बनाएं की एपीएल, बीपीएल में कन्वर्ट हो सकता है। आम नागरिक जिनके सरनेम गुप्ता, श्रीवास्तव, अग्रवाल, जाजोदिया, सोनी आदि है। इनका निवास स्थान भी शहर की धनाढ्य कॉलोनी में है राशन दुकान मगरपारा रोड माल के पीछे है। एपीएल को बीपीएल बनाने का रास्ता श्रम विभाग की असंगठित क्षेत्र का श्रमिक कार्ड बनाने वाली योजना से निकला, कोई भी व्यक्ति यदि किसी ठेकेदार से मजदूर होने का प्रमाण ले ले या पार्षद से प्रति माह एक निश्चित धनराशि से कम का आय प्रमाण पत्र प्राप्त कर ले तो ऑनलाइन आवेदन करके असंगठित क्षेत्र का श्रमिक कार्ड हासिल किया जा सकता है। 
राशन दुकानदार की दुकान मगरपारा में है तालापारा क्षेत्र के ई चॉइस सेंटर इस काम में माहिर है। एपीएल कार्ड बीपीएल में बदल गया और लगभग 3 साल से राशन दुकान संचालक इस काम को अंजाम दे रहा है। क्विंटल नहीं टनों की हेरा फेरी हो चुकी है। अब जब कलेक्टर ने एफआईआर का आदेश दिया तो खाद्य विभाग ने ताबड़तोड़ विभागीय जांच करा ली, अपने विभाग को क्लीन चिट दे ली, दस्तावेजों में कट छांट के बाद ही श्रमिक कार्ड बना है। यदि पुलिस ने सही जांच की तो चॉइस सेंटर वाले भी आईटी एक्ट में फसेंगे। पर फूड इंस्पेक्टर, खाद्य अधिकारी की मिली भगत के बिना यह काम नहीं हो सकता है सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि खाद्यान्न जब उठता है तो अंगूठा कौन लग रहा था। बायोलॉजिकल हेरा फेरी कैसे हुआ.....?