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समाचार में मृतक के जाति, वर्ण का उल्लेख सांप्रदायिकता फैलाने का बन सकता है कारण

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बिलासपुर, 19 फरवरी 2024।
हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक निर्देश जारी किया है और कहा कि मामलों में आवेदक अनावेदक की जाति का उल्लेख न करें यह निर्देश रजिस्ट्री के लिए है पर इन दोनों देश में ध्रुवीकरण का नशा कुछ इस तरह चढ़ा हुआ है कि दैनिक अखबारों की हेडिंग भी सांप्रदायिकता के सुर में ओतप्रोत हो रही है प्रदेश का जाना माना और अपनी निष्पक्षता के लिए पहचान रखने वाला " देशबंधु" अखबार भी इस जहर से स्वयं को नहीं बचा पा रहा। 19 फरवरी पेज नंबर 12 का पहला समाचार उसकी फोटो यहां लगाई गई है किस इरादे से जिस युवक की हत्या हुई उसकी जाति का उल्लेख, वर्ण का उल्लेख हो रहा है। अवैध निर्माण को हटाने के लिए क्या हत्या होने का इंतजार किया जाता है। अखबार की हेडिंग से तो ऐसा ही लगता है। पत्रकारिता के पैसे में पिछले 10 वर्षों में जो गिरावट आई थी उससे दैनिक अखबार के रिपोर्टर आमतौर पर बचते थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान में जिस तरह से बुलडोजर को न्याय का प्रतीक बनाया गया और जब-जब न्यायालय ने अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया पर संबंधित अधिकारियों को लताड़ लगाई उन खबरों को छुपाया गया क्या अब छत्तीसगढ़ में भी वैसा ही होगा?
देशबंधु की पत्रकारिता की निष्पक्षता की मिसाल दी जाती है। ऐसी उम्मीद इस अखबार से नहीं थी, इसी अखबार के अंतिम पृष्ठ पर प्रकाशित प्रिंट लाइन में स्पष्ट होता है कि एक ही व्यक्ति को प्रकाशक, मुद्रक और संपादक की जिम्मेदारी दे दी गई है। शायद यही से गलती होती है काम की अधिकता इसी तरह की गैर पेशेवर गलती करता है। हमने उपलब्ध लैंडलाइन नंबर पर संपर्क किया पर नंबर अनुत्रित रहा जब कभी अखबार के जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क होगा हम अपने समाचार को होने की टिप्पणी के साथ अपग्रेड कर देंगे।