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निगम के खेल निराले भूस्वामी को छोड़ किरायेदार को दीया नोटिस... श्याम टॉकीज का हाल
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समाचार -
बिलासपुर, 10 मई 2023। बिलासपुर के ख्यातनाम परिवार चितानी मितानी के उत्तरा अधिकारियों की श्याम टॉकीज जो कि नजूल भूमि है को वर्ष 2010 में क्रय किया गया यह कालखंड भारतीय जनता पार्टी की सरकार का दूसरा कालखंड था और शहर भर में केडिया और उनके सहयोगी तेजी से अपने साथियों के साथ नजूल भूमि खरीदते थे। इन्हीं लोगों ने लिंक रोड स्थित एक चलता हुआ पेट्रोल पंप की भूमि स्वामी कस्तूरी राव के 6 टुकड़ों में खरीदा। दबी जवान में भोंदू दास स्कैंडल मोपका में भी इनका नाम आता है। पर वह कहानी फिर कभी.......
अभी नजूल भूमि नजूल भूमि सीट क्रमांक 36 प्लाट नंबर 11/3, 4, 5, 6, 7 कुल रकबा लगभग 18000 स्क्वायर फीट के दो हिस्सेदार थे। एक सत्यदेव दुबे जो ख्यात रंगकर्मी पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त है, दूसरा कोटेश्वर प्रसाद दुबे जो बिलासपुर सत्र न्यायालय में ही नामी-गिरामी अधिवक्ता थी और गोल बाजार में हरदेव लाल मंदिर के सामने उनका स्थाई निवास हुआ करता था। दोनों भाइयों के नाम श्याम टॉकीज थी इस टॉकीज को उन्होंने जबलपुर नेपियर टाउन निवासी विश्वनाथ प्रताप दुबे को किराए पर दे दीया बाद में उनके स्थान पर उनका पुत्र अविनाश दुबे किरायदार हो गया और उसने भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं को अपना पार्टनर बना लिया वर्ष 2015 के आसपास यह टॉकीज बंद हो गई जब टॉकीज बंद हुई तब भूमि की वैधानिक उत्तराधिकारी श्रीमती पुष्पा दुबे पति कोटेश्वर प्रसाद दुबे और उनकी चार संतानों के नाम आ चुका था। पुष्पा दुबे इसी शहर में शिक्षा विभाग में उच्च पद पर नौकरी करते हुए सेवानिवृत्ति हुई और संपत्ति के दूसरे उत्तराधिकारी सत्यदेव दुबे 1980 के लगभग बॉलीवुड के रंगक्रम से जुड़ चुके थे और कभी कबार शहर आते थे। अनियमित किराया मिलने के कारण पुष्पा दुबे ने मात्र 5000000 रुपए में अपने इस संपत्ति को विक्रय किया इसके बाद खरीदने वालों ने मुंबई सत्यदेव दुबे से संपर्क किया और उनका दाम कुछ ज्यादा पृथक से तय हुआ अब इस विवाद में किरायेदार अविनाश दुबे ने प्रवेश किया और एक सिविल वाद बिलासपुर न्यायालय में दाखिल किया। पुष्पा दुबे ने क्रेता के पक्ष में मुख्तारनामा दिया और सत्यदेव दुबे ने मुंबई में मुख्तारनामा निष्पादित किया। सूत्र बताते हैं कि रजिस्ट्री के पूर्व ही दोनों की अलग-अलग समय पर मृत्यु हो गई इसी कारण 18000 वर्ग फुट जमीन का नामांतरण विवादित रहा इसी बीच अविनाश दुबे किरायेदार ने भी कभी समझौता किया तो कभी नए केस लगाए। भूखंड का लैंड यूज़ आज तक बदला नहीं कभी इस पुराने भवन को तोड़ने के बावजूद इस पर मीना बाजार ही लगाया जा रहा है। निगम ने अविनाश दुबे को जो नोटिस दिया है वह इसी संदर्भ में है इतना ही नहीं इस जमीन पर लाखों रुपए का टैक्स आबकारी विभाग का भी है क्योंकि श्याम टॉकीज के किरायेदारों ने बड़ी मात्रा में मनोरंजन कर जमा नहीं किया था। और नगर पालिक निगम ने भी वर्ष 2003 में संपत्ति कर ना पटाने पर संपत्ति में तालाबंदी का नोटिस दिया था अभी फिर से यह स्थान चर्चा के दायरे में हैं एक तरफ किरायेदार ने दीवार पर उच्च न्यायालय का प्रकरण क्रमांक लिखते हुए आम सूचना लगाई है, दूसरा नगर निगम ने भी अविनाश दुबे के नाम से नोटिस जारी किया है जबकि भूस्वामी कोई अन्य है। जिन्होंने नजूल रिकॉर्ड में तो अपने नाम दर्ज करा लिए होंगे पर निगम में नहीं कराएं। वैसे कोटेश्वर प्रसाद दुबे के पुत्री और नाती जिंदा हैं और मामले में यदि सक्रिय हुए तो न्यायालीन दांवपेच बढ़ेंगे। सत्यदेव दुबे अविवाहित थे मृत्यु पूर्व उन्होंने अपनी वैधानिक वसीयत लिखी थी, जिसमें मुंबई के एक अधिवक्ता को नियुक्त भी किया था सूत्र बताते हैं कि वसीयत की एक शर्त बड़ी अजीब है वसीयत बिलासपुर के एक नामचीन व्यक्ति की उपस्थिति में ही खोली जाएगी और उस व्यक्ति ने कभी अधिवक्ता से संपर्क नहीं किया। कुल मिलाकर चितानी मितानी परिवार की संपत्ति श्याम टॉकीज जो एक समय शहर की पहचान हुआ करती थी अब डोम में परिवर्तित हो गई है यह अभी बिलासपुर के भू माफिया का कारनामा है।


