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ना दे बधाई, आज हैं प्रेस फ्रीडम डे

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समाचार -
बिलासपुर, 3 मई 2023। आज 3 मई को प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाता है इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1993 में की थी हम जब भी प्रेस फ्रीडम डे मनाते हैं यह देखते हैं कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में हम कहां पर खड़े हैं। आज हमें यह कहने में कोई खुशी नहीं होती कि भारत देश की स्थिति प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में चिंतनीय स्थिति पर पहुंच गई है। 2022 में हम 142 में स्थान पर थे और आज 150 वें स्थान पर हैं। इस सूची में 180 देश है जिसमें सबसे निचली पायदान पर उत्तर कोरिया है, नेपाल की स्थिति हमसे बहुत बेहतर है इसकी स्थिति थी 76 वें नंबर पर हैं, बांग्लादेश 162 वें नंबर पर है, पाकिस्तान 157 पर है। हमारे देश में मीडिया की स्थिति इतने नीचे कैसे गई के लिए राजनैतिक रूप से पक्षपात पूर्ण मीडिया इसका बड़ा कारण है। दूसरा कारण है सत्तावादी, राष्ट्रवादी दबाव हमारे देश में मीडिया की स्वतंत्रता के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है इसे संविधान के अनुच्छेद 19-1-ए भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत ही हमें शामिल किया गया है। भारत पत्रकारों की जान के लिए सबसे खतरनाक देश माना जाता है। छत्तीसगढ़ में हाल ही में पत्रकार सुरक्षा कानून अस्तित्व में आया पर इसे पढ़कर यह पता चलता है कि मैदानी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को कोई विशेष लाभ नहीं होने वाला पिछले महीने केंद्र सरकार ने ऑनलाइन मीडिया वेबसाइट पर निगरानी रखने के लिए नया कानून लागू किया है जिससे सत्तावादी शिकंजा ऑनलाइन मीडिया पर कसने की तैयारी दिखाई देती है वैसे भी पिछले 8 वर्षों में मीडिया सत्ताधारी दल के गोद में बैठ गया है और जिन सवालों का जवाब उसे सरकार से लेना चाहिए उसके लिए प्रश्न विपक्ष से करता है यह स्थिति बताती है कि भारत में सत्तावादी सुमित के साथ मीडिया का खड़ा हो जाना लोकतंत्र के लिए कठिन स्थिति है मीडिया के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण देश से राजनीतिक लोकतंत्र और सामाजिक लोकतंत्र दोनों कारपोरेट घराने का बंदी हो गया है बची कुची उम्मीद डिजिटल मीडिया से है इसलिए आम लोकतंत्र प्रेमी जनता जो यह समझती है कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र खबरें कितनी जरूरी हैं तो उन्हें डिजिटल मीडिया को सपोर्ट करना ही होगा।