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निरंजन की किताब से फिर निकला जस्टिस लोया का विवाद
- By 24hnbc --
- Sunday, 19 Feb, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 20 फरवरी 2023। महाराष्ट्र के एक खोजी पत्रकार निरंजन टकले की एक किताब हु किल्ड जस्टिस लोया इन दिनों खूब पढ़ी जा रही है। पहले इसे किताब का अंग्रेजी संस्करण आया चार एडिशन समाप्त हो चुके हैं और पांचवा एडिशन छप रहा है। मराठी में भी चार एडिशन छप चुके हैं पांचवा आने वाला है इसी सप्ताह हिंदी एडिशन भी आ रहा है तो आंकड़ों के हिसाब से अब तक इस किताब की 10,000 प्रति अंग्रेजी में, 8000 मराठी में बिक चुकी हैं। ऑनलाइन इस किताब को पढ़ने वालों की संख्या लाखों में है। फिर भी इस किताब के विषय और उससे जुड़ी हुई बातों की चर्चा बेहद गंभीर है परिस्थितियां बताती है कि देश के भीतर सत्ता में बैठे लोग किस तरह अपने फायदे के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं और अपने अनुकूल फैसला ना देने वाले के खिलाफ किस हद तक जाते हैं। जस्टिस लोया की मौत नागपुर स्थित रवि भवन सरकारी गेस्ट हाउस में हुई वे अपने एक जस्टिस मित्र सोपरा जोशी की बेटी की शादी के लिए नागपुर आए थे। 30 नवंबर 2014 को वह नागपुर आए 1 दिसंबर 2014 रात 4:00 बजे उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर सुबह 6:18 पर उनकी मौत हो गई उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव लातूर में किया गया। पुस्तक के लेखक पत्रकार निरंजन बताते हैं कि किताब छपने के पूर्व कारवां मैगजीन में इस स्टोरी को 25 पाठ मे छापा गया उसके बावजूद ऐसा बहुत कुछ है जो लिखा जाना चाहिए। जस्टिस लोया के परिवार के पास ना तो कोई मेडिकल रिपोर्ट भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं थी ऐसा लगता था कि उन्हें कोई भी दस्तावेज जहान बूझकर प्रोवाइड नहीं कराया जा रहा था। जस्टिस लोया सीबीआई के विशेष जज थे और चर्चा में इसलिए थे कि गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख और कौशर बी एनकाउंटर 26 नवंबर 2005 का मामला उनकी अदालत में सुना जा रहा था। सीबीआई ने 1-2 हजार नहीं 10000 पेज की चारर्सिट प्रस्तुत की थी । जिसमें एक नाम भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अमित शाह का भी था। जब न्यायालय में यह प्रस्तुत नहीं हो रहे थे तब उस समय के जज ने कठोर रुख अपनाया और उनका तबादला हो गया। फिर इस मामले को बृज गोपाल हरकिशन लोया ने सुनना प्रारंभ किया दी वायर की एक रिपोर्ट जो 16 फरवरी 2019 को प्रकाशित हुई है उसमें 15 फरवरी दिल्ली में ली गई एक पत्रकार वार्ता जिसमें निरंजन टकले, मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस बीजी कोलसे उस समय की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, एच एस बल, जस्टिस लोया के अधिवक्ता मित्र उदय गवारे मौजूद थे में लिखा है कि जस्टिस की बहन अनुराधा बियानी ने आरोप लगाया है मुंबई हाई कोर्ट के एक चीफ जस्टिस पर जिसने जस्टिस लोया को मनमाफिक निर्णय देने के लिए 100 करोड़ की रिश्वत ऑफर की थी। जस्टिस लोया के संदिग्ध मौत पर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल याचिका भी लगी थी जो बाद में खारिज हो गई। किताब में बताया गया है कि नागपुर में जिस संदिग्ध परिस्थिति में जस्टिस लोया की मौत हुई और निरंजन टकले को खोजी पत्रकारिता करनी पड़ी वह कितना कठिन था। मृतक के परिचितों का इंटरव्यू हर बात एक से अधिक बार कैमरा लगाकर रिकॉर्डिंग नागपुर से लातूर तक कई फेरे अपने आप में इतना चुनौती भरा काम है निरंजन टकले इन दिनों भाजपा के टारगेट पर हैं उन्होंने 2017 में सावरकर के बारे में भी एक पुस्तक लिखी है जिसका शीर्षक ही मेमना कैसे बना शेर उन्होंने सावरकर द्वारा वॉइस राय को लिखी गई दया याचिका के फोटोग्राफ भी छापे हैं जिससे उन्होंने यह बताने की कोशिश कि सावरकर को ₹60 प्रति माह पेंशन किस बात की मिलने लगी कुल मिलाकर जब पूरे देश में गोदी मीडिया हिंदू मुसलमान और प्रायोजित विषयों पर एजेंडा चला रहा हो तब निरंजन जैसे पत्रकार समाज को सच्चाई बताने के लिए कितना जोखिम उठाते हैं यह दिखाई देता है। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में खुद स्वीकार किया वह वर्ष 2017 से नियमित वेतन पर नहीं है और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में ही काम कर रहे हैं।


