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80% आवेदकों को करना पड़ता है प्रथम अपील

स्वास्थ्य विभाग में अपरिपक्व जन सूचना अधिकारी

24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर, 27 जनवरी 2023। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का कार्यालय सूचना अधिकार अधिनियम को कितनी लापरवाही से डील करता है उसका एक उदाहरण उनके द्वारा प्रदान की गई जानकारी से ही मिलता है। प्रथम आवेदन पत्रों से असंतुष्ट हुए 80% आवेदक प्रथम अपील में जाते हैं। 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर के बीच कार्यालय को केवल 84 आरटीआई के आवेदन प्राप्त हुए जिसमें से प्रथम अपील में 64 आवेदक गए यह छोटी सी जानकारी देने में कार्यालय को पूरे 1 महीना लगा आवेदक ने अपना मूल प्रश्न 4 एक 2023 को प्रस्तुत किया और उसे अपने प्रश्न का जवाब 27 जनवरी को प्राप्त हुआ। मूल प्रश्न में पूछा गया था कि कार्यालय को 1 वर्ष के भीतर आरटीआई के कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए और उससे कितनी प्रक्रिया शुल्क प्राप्त हुआ इसी तरह प्रथम अपील और उसी से प्राप्त प्रक्रिया शुल्क तथा यह भी पूछा गया था कि बीपीएल के तहत कितने आवेदन प्राप्त हुए और कितनी तेज की जानकारी निशुल्क दी गई पर जन सूचना अधिकारी ने आधी अधूरी जानकारी प्रदान की बताया कि कुल 84 आरटीआई के आवेदन प्राप्त हुए और प्रथम अपील की संख्या 64 यही कारण है कि आवेदक को प्रथम अपील में जाना पड़ता है आवेदक ने जन सूचना अधिकारी स्वास्थ्य विभाग को जो मूल प्रश्न लिखा था वह बेहद सीधा सरल था उसमें कोई जानकारी पृथक से एकत्र करने की आवश्यकता ही नहीं थी पर अलाल जन सूचना अधिकारी प्रश्नों को बिना समझे जानकारी देते हैं और आवेदक को अनावश्यक रूप से प्रथम अपील में जाना पड़ता है। हमारी जानकारी यह कहती है कि स्वास्थ्य विभाग में जन सूचना अधिकार के आड़ में एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है और मूल आवेदन का जवाब न देकर जानबूझकर प्रथम अपील के लिए पहुंचाया जाता है। कई बार तो बड़ी प्रक्रिया शुल्क वाली जानकारियां आपसी समझौते के तहत निर्धारित दिवस के भीतर नहीं दी जाती और आवेदक को प्रथम अपील में जाने पर वही जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है ऐसा करके स्वास्थ्य विभाग में एक नया खेल इन दिनों चल रहा है।