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किसे कहे दोषी, सब सेक रहे हैं अपनी रोटी

धरा रह गया सर्वोच्च अदालत का आदेश

24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर, 26 दिसंबर 2022। साल के अंतिम महीने अंतिम सप्ताह में न्यायधानी कहीं जाने वाली बिलासपुर के उस भवन जहां जिले का प्रमुख के प्रशासनिक अधिकारी बैठता हो सामने आंदोलन के नाम पर जिस तरह देश के उच्चतम न्यायालय के निर्देश की अवहेलना की गई उसे किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। धरने पर बैठी महिला से सहानुभूति के पक्ष में कुछ तर्क दिए भी जाएं तब भी इस तरीके की गैर जरूरी हरकतों से बचा जाना चाहिए। शहर के जो नेता विधि ज्ञानी और वे लोग जो वहां किन्हीं भी कारणों से गए सब के सब उच्चतम न्यायालय के आदेश को ना मानने वाले बन जाते हैं। जिले की पुलिस और उसके अधिकारी यदि अपने ही पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी 5/12 /2022 परिपत्र क्रमांक 4/2022 को पढ़ ले तो उन्हें स्पष्ट हो जाएगा कि शनिवार, रविवार को जो लोग कलेक्ट्रेट गेट पर एकत्र थे उनके खिलाफ कौन सी कार्यवाही होनी चाहिए। पुलिस महानिदेशक श्री जुनेजा के द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र का विषय है यह है कि लैंगिक अपराधों से पीड़ित बच्चों एवं विधि विरुद्ध संघर्षरत बालक से संबंधित मामले में बच्चों का पहचान उजागर नहीं करने के संबंध में पत्र में आगे कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रीट पिटिशन क्रमांक 565/2012 निपुण सक्सेना विरुद्ध संघ शासन में क्या निर्देश दिया गया है और उसका पालन कैसे होना है पत्र में यह भी लिखा है कि ऐसे मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग समाचार दृश्य, श्रव्य माध्यम या संचार के किसी भी अन्य रूप में बालक की पहचान स्थापित नहीं होना चाहिए उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है। 
अब देखें कि बिलासपुर कलेक्ट्रेट के गेट पर क्या हुआ और किस तरह देर रात से ही डिजिटल मीडिया में समाचार चलने लगे आंदोलनकारियों द्वारा किस तरह सीडब्ल्यूसी की नाकामी को ढाल बनाकर पूरा राजनीतिक प्रपंच खेला जाने लगा प्रशासन पे बिना सोचे समझे अनाचार के आरोपी की पहचान भी उजागर की गई और यह भी कहा गया कि प्रशासन उसका फेवर कर रहा है। पाठकों को याद होगा कि लगभग 2 साल पूर्व इसी तरह एक आंदोलन एड्स पीड़ित बच्चों की सेल्टर देने वाली संस्था के संदर्भ में भी किया गया था और लापरवाही पूर्वक ऐसे बयान दिए गए थे जिनसे सेल्टर होम की पहचान न केवल उजागर कर दी गई बल्कि अपने निजी लाभ के लिए उसमें रहने वाले एड्स पीड़ित का चेहरा भी खूब दिखाया गया। इस संदर्भ में एनसीपी के प्रदेश प्रवक्ता निलेश बिसवास का बयान बेहद समझदारी पूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है और आईपीसी 228 ए के तहत आता है इस संदर्भ में डीजीपी छत्तीसगढ़ का नोटिफिकेशन भी है बेहतर होगा इस का राजनीतिकरण ना किया जाए आज इसी संदर्भ में बिलासपुर एसडीएम श्रीकांत वर्मा ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है। 
उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति के आदेश से व्यथित होकर प्राथी महिला ने कुछ अन्य लोगों के साथ कलेक्टोरेट गेट पर शनिवार से धरना पर बैठ गई थी। उन्हें धरना समाप्त करने के लिए प्रशासन द्वारा बार-बार समझाइश दी गई। जिससे वह अपने भाई के साथ रविवार की रात अपने घर चली गई। इसके बावजूद आप पार्टी के कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठे रहे। आप पार्टी वालों को बताया गया कि यह धरना प्रदर्शन के लिए निषिद्ध इलाका है। इसलिए इस जगह को खाली कर दें। बार-बार उन्हें खाली करने की समझाइश दी गई। इसके बावजूद इंकार किये जाने पर पुलिस प्रशासन द्वारा धारा 151 के तहत मामला दर्ज किया गया। उन्हें गिरफ्तार कर आवश्यक कार्यवाही के लिए कोनी थाना ले जाया गया है।
पूरे घटना चक्र से ऐसा लगता है कि शहर में इन दिनों कुछ ऐसी ताकतें सक्रिय है जिन्हें समाज का अमन चैन खल रहा है। और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों और लोकतंत्र के चौथे खंभे से भी जागरूकता और नियमों को मानने की उम्मीद की जानी चाहिए।