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कांग्रेसी नेता की हत्या का मुख्य षड्यंत्रकारी उसका पिता लोकतंत्र सेनानी मीसाबंदी रहा है
- By 24hnbc --
- Tuesday, 20 Dec, 2022
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समाचार -
बिलासपुर, 20 दिसंबर 2022। बिलासपुर के हिस्ट्रीशीटर प्राण नाथ त्रिपाठी उर्फ संजू के हत्याकांड में पहले दिन अर्थात 14 दिसंबर से ही जो सबसे बड़ा मामला हाईलाइट हुआ वह यह है कि हिस्ट्रीशीटर संजू त्रिपाठी के वाहन पर महामंत्री जिला कांग्रेस की पट्टी लगी हुई थी और बिलासपुर पुलिस की ओर से इस आशय का विज्ञप्ति भी जारी हुआ कि मृतक का कांग्रेस पार्टी से कोई संबंध नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ने भी यही कहा पर कुछ अखबारों में कांग्रेस पदाधिकारियों की सूची की फोटो छपी और उसमें संजू त्रिपाठी का नाम था। त्रिपाठी परिवार का राजनीतिक दलों से पुराना संबंध है। जय नारायण त्रिपाठी ना केवल जनसंघ जो बाद में भारतीय जनता पार्टी बनी की टिकट पर वार्ड नंबर 1 से चुनाव लड़े थे जीते थे साथ ही शनिचरी बाजार स्थित उनके घर पर लोकतंत्र सेनानी परिवार की पट्टी अभी भी लगी है जिसका कारण यह है कि वह आपातकाल में जेल गए।
भारतीय जनता पार्टी ऐसे सब लोगों को जो आपातकाल में जेल गए लोकतंत्र सेनानी का दर्जा देती है इसे मीसाबंदी कहा जाता है इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी जब चुनाव जीतकर सत्ता में आई तो छत्तीसगढ़ में 2008 से ऐसे मीसा बंदी को लोकतंत्र सेनानी कहा जाने लगा। 2008 में सरकार ने पेंशन भी शुरू कर दी जो कांग्रेस सरकार बनने तक जारी रही कांग्रेस सरकार ने ही मीसा बदियों की पेंशन बंद की बिलासपुर से मीसा बंदियों की जो सूची दैनिक अखबारों में प्रकाशित हुई है उसमें जय नारायण त्रिपाठी का नाम भी है सवाल उठता है कि जब 2008 में तत्कालीन सरकार ने मीसा बंदियों को पेंशन की घोषणा की तब क्या मीसा बंदियों का कोई पुलिस वेरीफिकेशन रिकॉर्ड नहीं मंगाया गया पेंशन के पहले क्या मीसा बंदियों के संबंध में कोई विशेष शाखा की रिपोर्ट भी प्राप्त नहीं की गई यदि की गई तो जय नारायण त्रिपाठी पिता हरगोविंद त्रिपाठी के संदर्भ में उसके अपराधी के रिकार्डों को कैसे छुपा लिया गया। मीसा बंदियों की पेंशन देश के टैक्सपेयर के पैसे से दी गई है उस टैक्सपेयर के पैसे से यदि जय नारायण त्रिपाठी जैसे हिस्ट्रीशीटर को लाभ हुआ तो यह छत्तीसगढ़ जनता का अपमान है और उस व्यवस्था का भी अपमान है जो एक आदतन गुंडा मवाली हिस्ट्रीशीटर को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा देती है और उसे पेंशन भी देती रही ऐसा जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर से संभव हुआ उनके खिलाफ भी जांच होनी चाहिए।


