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वेतन घोटाले का आरोपी पहुंचा हाईकोर्ट

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समाचार :-
बिलासपुर, 1 नवंबर 2022। कार्य से अनुपस्थित आरक्षक जगमोहन पोर्ते के खाते में वेतन शाखा प्रभारी तनख्वाह डालता रहा और उधर कोई खाते से पैसा निकाल लेता रहा यह सिलसिला एक-दो महीने नहीं एक दो साल नहीं 7 साल तक चलता रहा। शासन को 32 लाख रुपए का नुकसान हुआ। डीई के लिए वेतन शाखा प्रभारी भागीरथी महार, सुधीर श्रीवास्तव, आशुतोष कौशिक और सुरेंद्र पटेल को जांच में उपस्थित होने को कहा गया। सभी ने उन दस्तावेजों की मांग की जिसके आधार पर उन्हें दोषी ठहराया जा रहा है। जांच अधिकारी ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए इसी को आधार बनाकर सुधीर श्रीवास्तव उच्च न्यायालय पहुंचा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू की बेंच में यह मामला लगा है प्रारंभिक सुनवाई के बाद गृह सचिवालय डीजीपी, आईजी, एसपी बिलासपुर और तत्कालीन जांच अधिकारी को नोटिस जारी किए गए हैं। 
बिलासपुर पुलिस के वेतन शाखा में इस तरह के घोटाले कई साल से चल रहे हैं वर्तमान मामले में आरक्षक जगमोहन पोर्ते 2013 में सिविल लाइन थाना आरक्षक पद पर ज्वाइन किया और कब कहां गायब हो गया नहीं पता, पर 2021 तक उसके खाते में वेतन डलता रहा और आहरण भी होता रहा। बताया जाता है कि इस खेल के पीछे अधिकारियों के बंगला ड्यूटी का खेल होता है। आरक्षक का वेतन थाने से निकलता है पर ड्यूटी वह कहीं और करता रहता है।