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भोंदू स्कैम के पहले लिंगियाडीह में हुआ था बड़ा खेल, भोंदू प्रकरण के मूल शिकायतकर्ता को निपटाने कैसे खेली गई शतरंज
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । बिलासपुर में भू माफिया और तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता/ पत्रकार की दोस्ती जमीनी घपले उजागर करने की असल कहानी है। चिल्हाटी स्थित सरकारी जमीन भोंदू दास के नाम पर चल गई है इसकी पहली शिकायत नवल शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने बिलासपुर में कार्यवाही ना होते देख सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की थी यह मामला 2021 के पूर्व का है। बाद में नवल शर्मा को ठीक करने के इरादे से नवल शर्मा के विरुद्ध एक परिवाद सीजीएम कोर्ट में लगा आवेदक ने स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता/ पत्रकार बताते हुए नवल शर्मा के विरुद्ध यह कथन किया कि उसने बिना कॉलोनाइजिंग लाइसेंस के लिंगियाडीह पटवारी हल्का नंबर 20, खसरा नंबर15/63, रकबा 1.90 एकड़ को टुकड़ों में विक्रय किया और 15/ 63 में, .71 एकड़ जमीन अतिरिक्त बेच दी, अतिरिक्त बेची हुई जमीन किसकी है यह जांच का विषय है। परिवाद पर आरंभिक सुनवाई के बाद माननीय न्यायालय ने थाना सिविल लाइन को अपराध पंजीबद्ध करने का निर्देश दिया और आवेदक ने सिविल लाइन थाने में प्रथम सूचना पत्र दायर करा दिया जिसमें भा.द.स. के तहत धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी के तहत मामला दर्ज हो गया। इसके बाद सिविल लाइन थाना और राजस्व विभाग के बीच पत्राचार का खेल प्रारंभ हुआ। 28/1 /2021 थाना प्रभारी सिविल लाइन ने तहसीलदार बिलासपुर को अपराध क्रमांक 400/16 में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कागजों को मांगा उन्होंने कहा कि भूमि स्वामी नवल शर्मा ने खसरा नंबर 15 /63 में 1 एकड़ 90 डिसमिल से अधिक की बिक्री कर दी है भूमि स्वामी हक के अतिरिक्त जमीन बेची गई है किंतु तहसीलदार ने सहयोग नहीं किया तब पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर से तत्कालीन कलेक्टर जिला दंडाधिकारी को एक पत्र प्रेषित हुआ जिसकी तारीख 16/1/ 2020 है। पुलिस अधीक्षक ने पत्र में लिखा है कि बिलासपुर एसडीएम उप पंजीयक भू अभिलेख शाखा प्रभारी तहसीलदार बिलासपुर, नायब तहसीलदार बिलासपुर को एक से अधिक बार पत्र भेजा गया किंतु उक्त जानकारी आज पर्यंत अप्राप्त है। और प्रकरण 4 सालों से लंबित है इस पत्र के साथ 25 प्रतियां संलग्न कर कर भेजी गई थी किंतु आगे कार्यवाही नहीं बढ़ पाई इस पूरे प्रकरण से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि बिलासपुर में सुनियोजित तरीके से एक दूसरे को निपटाने के लिए मोहरे ढूंढे जाते हैं और सामान्य जन ठगी के शिकार हो रहे हैं असल में पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे महंगी जमीन बिलासपुर जिले में है इसका कारण यह है कि बिलासपुर में जमीन ही नहीं है जब रिश्वत बांटकर झूठे दस्तावेजों के आधार पर जमीन खड़ी की जाती है तो मेहनत भ्रष्टाचार रिश्वत में बांटी गई रकम और जमीन की कीमत का कुल जोड़ जमीन का रेट तय कर देता है ₹500 वर्ग फुट की वास्तविक जमीन 18 से ₹20000 स्क्वायर फीट तक बिकने लगती है इसमें यदि एफ आई आर हो गई तो उसे कचरे के डब्बे में डाल देने की कीमत भी जुड़ जाती है इसे छत्तीसगढ़ का बिलासपुरीया स्कैम कहा जाता है।


