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फरार होने का अवसर देकर चालान प्रस्तुत करना, पुलिस की कार्यशैली का एक उदाहरण
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । बिलासपुर जिले में ग्रामीण थाना हो या शहरी पुलिस की कार्यवाही कब कैसी होगी इसका अंदाज लगाना अब कठिन नहीं है और यह भी तय है की पुलिस की कार्यवाही नियम अनुसार नहीं होगी हम तीन घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं। पहली घटना फरवरी 2022 की है, उस दिन शहर में प्रदेश के मुख्यमंत्री आए थे। दोपहर के वक्त समता कॉलोनी गार्डन में गैंगवार में एक युवक की बेदर्दी से हत्या की गई , शाम तक एफआईआर हो गई मुख्य नाबालिग अभियुक्तों की धरपकड़ की जाने लगी और खबरों में आने लगा कि हत्याकांड के पीछे एनएसयूआई के नेता वसीम खान की भूमिका महत्वपूर्ण है। तत्काल वसीम खान बिलासपुर पुलिस अधीक्षक के कार्यालय पहुंच गए और अपनी बेगुनाही के ज्ञापन देने लगे तब पुलिस अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की बात कही और 24 घंटे के भीतर अभियुक्त कांग्रेसी नेता फरार हो गया। अब 90 दिन के बाद नियमानुसार चालान प्रस्तुत किया जा रहा है अभियुक्त वसीम खान को फरार बता कर।
दूसरी घटना ग्रामीण थाना क्षेत्र मस्तूरी की है, 23 अप्रैल को लिखी गई एफआईआर के मुताबिक सड़क पर एक युवक को इतना पीटा गया कि उसकी जान पर बन आई। पहले गोलू तिवारी, बड़े महाराज, द्वारिका तिवारी, भोलू कश्यप के खिलाफ साधारण धाराओं में मामला पंजीबद्ध हो गया। पीड़ित युवक इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुआ और वह आज भी अपने पैरों पर चल फिर नहीं पा रहा है सड़क पर पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित स्थानीय प्रेस क्लब पहुंचा और अपनी व्यथा बताई फिर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर मस्तूरी थाना टीआई ने एफआईआर में धारा 307 बढ़ा दी, अब पूरे अभियुक्त फरार हो गए। मस्तूरी के टीआई गिरफ्तारी का प्रयास करने के स्थान पर 90 दिन का प्रक्रिया पूरा कर रहे हैं।
एक ऐसा ही मामला मस्तूरी थाने का और है जब कांग्रेसी नेता टांकेश्वर पाटले के घर डकैती हुई और जिसे घटना का मास्टरमाइंड बताया गया वह फरार हो गया। पुलिस ने सहयोगी अपराधियों को पकड़ कर केस सॉल्व बताते हुए 5,000 नगद बरामद बताते हुए इतिश्री कर दी। लगभग 1 माह बाद गौड़पारा क्षेत्र में एक ज्वेलर की दुकान पर अपराधी तत्व लूट के इरादे से घुसे और दुकानदार को गोली मारी भाग रहे थे सब हिम्मती पड़ोसियों ने अपराधी तत्वों को पकड़ लिया पता चला जिसे पकड़े हैं उसकी तलाश तो बिलासपुर पुलिस उड़ीसा तक कर आई और यह आदमी दर्रीघाट डकैती कांड का मुख्य आरोपी है वाहवाही पुलिस लूट ले गई अपराधी तत्व को आम नागरिकों ने पकड़ा।
एक अन्य घटना जिससे पता चलता है कि पुलिस कैसे मामले में त्वरित रैपिड फोर्स के समान काम करती है याद करें कांग्रेस के एक ब्लॉक अध्यक्ष का शहर के भीतर एक ट्रैफिक पुलिस के सिपाही से विवाद हो गया और पुलिस सिपाही ने नेता के विरुद्ध थाने में शिकायत कराया पुलिस ने तेजी से कार्यवाही की और फरार नेता को नागपुर से हिरासत में लेकर आ गई हालांकि 2 दिन के भीतर ही नेताजी की जमानत हो गई इस पूरे क ख ग से यह समझ आता है कि पुलिस आदतन अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से बचती है और गैर पेशेवर सामान्य नागरिक जो कभी उत्साह या उत्तेजनावश अपराध कर बैठते हैं उन्हें अपना रौद्र रूप दिखाती है।


