No icon

नवजात शिशु हत्या मामला

पितृसत्तात्मक पुरुषवादी सोच की अति रंजनापूर्ण रिपोर्टिंग से बिखर जाते हैं कई परिवार

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। एक महिला द्वारा अपनी ही बच्ची को पटक कर मार देने संबंधी अपराध को जिस तरह बिलासपुर के मीडिया ने लिखा पढ़ा प्रसारित किया उससे यह स्पष्ट होता है कि केवल जांच एजेंसी ही नहीं, पत्रकारों में भी पितृसत्तात्मक सोच किस तरह हावी है और इसी कारण वे पूरे मामले में आरोपित महिला की फोटो और उसके एक्स्ट्रा मैरिटल संबंधों को लेकर चटकारे लेकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। पत्रकारिता की मर्यादा को अति उत्साह में इस तरह लांघा गया कि महिला के घर का फोटो महिला का फोटो उसकी संतानों की संख्या के बारे में जिक्र साथ ही शादीशुदा पुत्रियों की संख्या सबका इस तरह खुलासा किया की पहचान छुपाने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की खुलकर धज्जियां उड़ाई। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ हे मां मेरे प्राण बेवजह क्यों हरती है। जैसी हेडिंग भी लगाई इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू किसी ने नहीं देखा। आरोपित महिला के दैहिक संबंध जिस किसी भी पुरुष से रहे हो क्या उस पुरुष का यह नैतिक उत्तरदायित्व नहीं था कि वह 9 माह के गर्भावस्था के दौरान अपनी सेक्सुअल पार्टनर का पूरा ध्यान रखता। पूरे प्रकरण में केवल महिला को उत्तरदाई ठहरा देना और पुरुष को देवता मानकर इंडोसेंट करार दे देने से यह लगता है की जांच एजेंसी में जांच अधिकारी कोई भी हो उसके ऊपर पुरुष मानसिकता किस कदर हावी रहती है। बिलासपुर शहर में इन दिनों जो पुलिस कप्तान है वे बेहद संवेदनशील अधिकारी मानी जाती है हम उम्मीद करते हैं कि वे इस बात की जांच कराएगी की आरोपित महिला की फोटो पुलिस के ऑफिशियल ग्रुप के ग्रुप में किसने साझा की क्योंकि वहीं से फोटो मीडिया को प्राप्त हुई और उसका बखूबी दुर्भाग्यपूर्ण उपयोग मीडिया के द्वारा किया गया।