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31 साल बाद भी हमारी बुद्धि चोली और चुनार में ही अटकी

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बिलासपुर, 18 मार्च 2026।
1993 में एक बड़ा लोकप्रिय गाना था चोली के पीछे क्या है चुनरी के नीचे क्या है आज हम 2026 पर खड़े हैं 31 साल हो गए पर हम और हमारी नैतिकता चुनरी के आसपास ही घूमती है। नया विवाद सर के चुनार गाने पर उठा है। संजय दत्त नोरा फतेही पर फिल्माया गया यह गाना कुछ लोगों को अच्छा नहीं लग रहा इस गाने में उन्हें अश्लीलता दिखाई देती है। इसी तरह एक गाना दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान का था जिसमें लोगों को उसे गाने में दीपिका के कॉस्टयूम के कलर पर भारी आपत्ति थी। ग्लैमर की दुनिया में अधिकतर काम व्यावसायिक होता है सफलता ही सब कुछ है। ऐसे में जो दर्शकों को अच्छा लगेगा उनकी भावनाओं को उभरेगा वही तो बिकेगा। ऐसे में गानों को लेकर बहुत ज्यादा शिकायतें शिकायतकर्ता के दिवालिया पान को बताते हैं। अभी राष्ट्रवाद का ओवरडोज दिया जा रहा है। प्रोपेगेंडा फिल्में इसी का परिणाम थी जिसका बुखार धीरे-धीरे उतर गया। हालत यह है कि एक राजनीतिक दल विशेष के नेता पिक्चर दिखाने के लिए टिकट तक की व्यवस्था करते हैं। और इस राजनीतिक दल के मानसिकता वाले लोग सामान्य गानों में भी नैतिकता ढूंढने लगते हैं। उन्हें उज्जैन का महामंडलेश्वर कांड याद नहीं आता, उन्हें याद नहीं आते शंकराचार्य पर लगे आरोप उन्हें तो कभी दीपिका कभी माधुरी तो कभी फतेही ही दिखाई देते हैं।