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पीटपिटीया सांप जाएंगे जेल, कोबरा पर नहीं डालेगा कोई हाथ

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बिलासपुर, 20 जुलाई 2026। 
बिलासपुर की तहसील और एसडीएम कार्यालय में जो न हो काम है। मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर से ज्यादा बड़ा खेल सर्पदंश के मामलों में एसडीएम कार्यालय में खेला गया। 2 वर्ष पूर्व 24 hnbc ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पर बड़ा खुलासा किया था। जैसे ही फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के 200 मामले के कागज आरटीआई से निकल गए तहसीलदार ने संबंधित थाने में एफआईआर कराई। यहीं से जांच की दिशा बदल जाती है। छोटे-मोटे दलालों की गिरफ्तारी के बाद पूरे खेल के सूत्रधार को भुला दिया गया। यदि जांच सही तरीके से होती तो पता चलता की इन फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों का उपयोग क्या किया गया। और असली आर्थिक बदमाशियां तो वही हुई। 
सर्पदंश में मुआवजे का घोटाला 17 करोड़ पार कर रहा है एसडीएम और तहसील कार्यालय के तीन क्लर्क के ही निपटे हैं। क्या ऐसा घोटाला केवल क्लर्क लेवल पर निपट सकता है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट यदि आसान है तो अपराधियों के छूट जाने की असली वजह भी फर्जी पोस्टमार्टम ही है। बताया जाता है कि ऐसे मामले में एक महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी नागपुर से हुई थी और उन्हें थाने से ही छोड़ गया। इसी तरह बताया जाता है कि इस मामले में संलिप्त एक आरोपी को सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत भी मिली है जबकि परिवाद के आधार पर दर्ज एफआईआर जैसे मामलों में सत्र न्यायालय सक्षम होते हुए भी अग्रिम जमानत नहीं देता तो इतने गंभीर मामले में जिसकी गूंज विधानसभा सत्र में भी हुई है अग्रिम जमानत हो जाना बताता है कि 17 करोड़ के सर्पदंश मामले में छोटा पीटपिटीया सांप पकड़े जाएंगे और कोबरा चैन की बंसी बजाएगा।