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खबर बनाने वाले क्यों बन रहे स्वयं खबर

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बिलासपुर, 9 फरवरी 2026। 
यह पूरा मामला बिलासपुर प्रेस क्लब पंजीकृत की हाल की गतिविधियों पर है। सबको नियमों का टॉर्च बताने वाले पत्रकारों की समिति बिलासपुर प्रेस क्लब बिलासपुर, में कई सालों से नियमों का पालन ही नहीं हो रहा, पर किसी ने कभी संपूर्ण स्वच्छता अभियान नहीं चलाया। एक बार सलवा जुडूम का हल्ला करते हुए संघियो ने आदत अनुसार आरोपो की ऐसी बौछार कि की उसे समय के पदाधिकारी की कार्यकारणी के अन्य पदाधिकारी ने सामान्य समिति के सामने इस्तीफा दे दिया। बचे अध्यक्ष ने जैसे-तैसे हिसाब प्रस्तुत करके नए चुनाव की घोषणा कर दी। यह कहानी नए सदस्यों को भले ही ज्ञात न हो पर ऐसे सदस्य जिन्हें समिति की सदस्यता लिए 10 वर्ष से अधिक हो चुका है उन्हें ज्ञात है। 
रॉबिन हुड बनकर जो नेता आए उन्होंने तानाशाही का वही डंडा चलाया जो अभी एन केन प्रकारेण चुनाव जीतकर देश में हो रहा है। समिति तो समिति रॉबिन हुड ने सहकारि समिति बनाई और वोटो को अपने पास बंधक बना लिया। एक से ज्यादा बार बगैर चुनाव टेबल थप थपवा कर अपना विजय घोष करवाया। कागजों का अध्ययन करें तो वही सहकारी समिति भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई और जमीन न मिलने का रोष समिति पर हाबी हो गया। मैं दिलाऊंगा, मैं दिलाऊंगा के नारों के बीच मतदाताओं ने एक से ज्यादा बार भरोसे का यह बताशा खाया। आखिर बताशा कड़वा होता गया आश्चर्य नहीं करना चाहिए कि कुछ निर्वाचन अधिकारियों ने भी अपना स्वार्थ पूरा किया और निर्वाचन प्रक्रिया को दूषित किया। आखिरकार मामला रजिस्टर के समक्ष पहुंचा और वर्ष 2025 में रजिस्टर को निर्वाचन अधिकारी बनाते हुए अवर सचिव के आदेश पर जिला कलेक्टर बिलासपुर ने बिलासपुर प्रेस क्लब बिलासपुर की समिति का चुनाव करवाया।
पहली बार नियम पूर्वक मतदान हुआ और परिणाम घोषित हुआ पर पराजित प्रत्याशी में से जिनके पास पूर्व पदाधिकारी होने का तमगा था उनका सहयोग इतना की वे विधि पूर्ण तरीके से नए निर्वाचित पदाधिकारी को कार्यभार शौप ही नहीं रहे हैं। यह पूरे मतदाताओं का सरासर अपमान है। प्रेस क्लब बिलासपुर के खाते में कोई बड़ी रकम कभी नहीं रही कुछ हजार में ही इस खाते का हिसाब किताब होता है। पर उसे भी नए निर्वाचित कार्यकारिणी को ना देना अजब गजब है। ऐसे में निर्वाचित नए पदाधिकारी के सामने क्या विकल्प है इसी को ध्यान में रखकर शायद सामान्य सभा की बैठक ही एक रास्ता है। जहां आम सदस्य अपने नेताओं को यह बता सकेंगे की कौन का एटीट्यूड सही है। और जिनका एटीट्यूड सही नहीं है उनके कार्यकलापों को लेकर प्रेस क्लब के साधारण सदस्य अपने निर्वाचित पदाधिकारी से क्या चाहते हैं।