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जब मिल रहा था प्रसाद तब वाद की नहीं थी याद

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बिलासपुर, 17 दिसंबर 2023।
2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत स्पष्ट बहुमत से बहुत ऊपर हुई जिस व्यक्ति को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई उसे छत्तीसगढ़िया संस्कृति से लगाव था और यह स्वाभाविक था दिखावटी नहीं यह अलग बात है कि राज्य के व्यापारी तबके को यह छत्तीसगढ़िया राग नहीं भाया। भूपेश सरकार कैसे निपटी, किसने निपटाया यह अलग कहानी है। जिस पर बाद में कभी चर्चा की जा सकती है।
आज चर्चा मौका परस्त पत्तलकारो कि .... 5 साल छत्तीसगढ़ के स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संवाद ने खूब विज्ञापन दिए। जिन्हें विज्ञापन मिलने का हक था के अतिरिक्त ना हक वाले भी खूब उत्कृष्ट हुए ऐसे अखबार मालिक भी उत्कृष्ट हुए जिनका छत्तीसगढ़ी संस्कृति से कुछ लेना देना नहीं है। वे अविभाजित मध्य प्रदेश से नहीं आए उनकी जेड केशव कुंज में है। ऐसे ही एक अखबार जिनका संपादक दुर्ग से वास्ता रखता है जिसकी प्रिंट लाइन में पता चलता है कि अखबार रायपुर, बिलासपुर, भोपाल, जबलपुर, रांची से प्रकाशित होता है को, ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को गेड़ी पर चलते, भौरा चलाते, सौटा खाते, नदी में नहाते की दर्जनों फोटो छापी यह सब समाचार विज्ञापन के अतिरिक्त थे बताया जाता है कि अखबार का संपादक और भूपेश बघेल का गृह जिला एक ही है। बघेल जी संपादक की मेहनत के कायल भी हैं पर सत्ता बदलते ही संपादक महोदय का पत्तलकार चरित्र जाग गया। यदि लिखना ही था छत्तीसगढ़ी संस्कृति को भूपेश का छद्म लिखना था तो यह विचार की अभिव्यक्ति 5 साल में कभी भी की जा सकती थी। कब उन्हें पत्तलकार का खिताब नहीं मिलता और हम उन्हें सम्मान से पत्रकार कहते पर अब गिरगिट कह रहे हैं। ऐसे गिरगिटो से नेताओं को सदा सावधान रहना चाहिए। 5 साल में कांग्रेस और 15 साल भाजपा ने किसे विज्ञापन दिया किन लोगों को पहले पोशा, जांच का विषय है।
याद करें कांग्रेस सरकार बनते ही संवाद पर छापे मारे गए थे तब के अधिकारी और सत्ता के करीबी कई पत्रकार और संपादकों की कहानियां आज भी चटखारे लेकर सुनी जाती है, सुनाई जाती है। परिपक्व नेता जानता है कि किसमे रीढ़ की हड्डी हैं। कौन तटस्थ है किस पद देकर पूचकारना है । कांग्रेस की तो हमेशा आदत ही है कि सत्ता में बैठते हैं वामपंथी विचारधारा के लोगों को पोशो या आरएसएस के समर्थक सूत्रों को लाल बत्ती दो और बदले में यह कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालें।
भूपेश बघेल की सत्ता का जहाज डूबा उसमें कोई आश्चर्य नहीं है पर अब यह भी सत्य है कि कोई मुख्यमंत्री गेड़ी पर चलता और भौरा खेलते सौटा खता दिखाई नहीं देगा। हां प्रदेश में घर वापसी और पैर धोते लोग दिखाई देंगे।