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विधि शुन्य CNI चलाना चाहती है अपनी तानाशाही

निलंबित प्राचार्य ने बताया असली मुद्दा

24hnbc.com
बिलासपुर, 9 मार्च 2026। 
छत्तीसगढ़ हो या मध्य प्रदेश CNI अपनी मर्जी की मालिक बनकर काम करना चाहती है और समाज को सही तथ्य से अवगत करने वाले पादरी को विवादित बनती है। जबलपुर के मुख्य गिरजाघर कि रविवार की घटना कुछ इस तरह की है। निलंबित प्राचार्य कर मैथ्यू के खिलाफ संबंधित थाने में एक शिकायत की गई कहा की प्रार्थना के दौरान चर्च में हंगामा कर रहे थे। 
मैथ्यू के उपलब्ध मोबाइल नंबर पर हमने उनसे संपर्क किया और पूरी बात जानी चाहीं। उन्होंने बताया कि मामला 100 से अधिक वर्ष पुरानी विधवा आश्रम का है। इस आश्रम को फ्रांसिस लीगल नाम के व्यक्ति ने 1880 में निर्मित कराया रुपए 26400 के प्रॉमिस नोट के साथ यह संचालित था और उन्होंने अपनी मृत्यु के पहले ही इस पर एक ट्रस्ट बनाया जिसका मुख्य ट्रस्टी कमिश्नर जबलपुर है। अब इस भवन को cni जिसका अस्तित्व 1970 में ही समाप्त हो गया है। अपना घोषित करके विधवा आश्रम को खत्म करना चाहता है और मैं इसी बात को रखना रविवार गिरजाघर गया। जहां अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम चल रहा था उन्होंने यह भी कहा कि cni देश की सर्वोच्च अदालत से विधि शून्य घोषित हो चुकी है। इसके अतिरिक्त wp11459/2005 उच्च न्यायालय जबलपुर जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने निर्णय में कहा था कि किसी भी स्कूल से डायोसिस रकम प्राप्त नहीं कर सकती पर निर्णयों को भूलकर ऐसा हो रहा है। मूल बातों को हटाकर निरर्थक विवाद cni पदाधिकारी करते हैं और आवाज उठाने वालों को प्रताड़ित करते हैं। यही मेरे साथ हुआ।